इनफोसिस ने शानदार नतीजे घोषित किए और नए वित्त वर्ष के लिए संभावनाएं भी अच्छी पेश कीं। हालांकि पहली तिमाही को लेकर कंपनी ज्यादा आशावान नहीं है। इसी के चलते बाजार कमजोरी के साथ खुला। लेकिन जल्दी ही इनफोसिस इससे उबर आया और उसमें भारी मात्रा में कारोबार हुआ। इनफोसिस के नतीजों में ऐसा कुछ खास नहीं है कि उसके स्टॉक के बारे में फिर से रेटिंग की जाए। जैसा कि मैने कल अपने कॉलम में जानकारऔरऔर भी

इस समय यूलिप जैसे नए-नए बीमा उत्पादों में जिस-जिस तरह के शुल्क होते हैं, जैसी गणनाएं होती हैं, जिस तरह का बेनिफिट चार्ट पॉलिसी बेचने से पहले ग्राहक को समझाना प़ड़ता है, उससे ये इतने जटिल हो गए हैं कि गणित के अच्छे-खासे ग्रेजुएट के लिए भी इन्हें बेच पाना मुश्किल है। लेकिन इस समय देश में इन्हें हाईस्कूल से इंटर पास लोग तक बेच सकते हैं और बेच रहे हैं। कहने को बीमा एजेंट बनने केऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार आज ढीला रहा, इसलिए क्योंकि कारोबारी कल आ रहे इनफोसिस के नतीजों को लेकर कोई दांव नहीं खेलना चाहते। इतना तय है कि महज एक तिमाही में डॉलर के सापेक्ष रुपए के 12 फीसदी बढ़ जाने से भावी नजरिए को बेहतर करना या पिछले स्तर को बरकरार रखना भारी मुश्किल काम है, भले ही यह कंपनी इनफोसिस ही क्यों न हो। हमारे विश्लेषकों के मुताबिक इनफोसिस कल याऔरऔर भी

इनफोसिस टेक्नोलॉजीज के नतीजे आने में बस एक दिन बचा है। कल 13 अप्रैल को इसके नतीजे आएंगे। रुपया जिस तरह मजबूत होता जा रहा है, उसमें आईटी सेक्टर के निवेशक हैरान-परेशान से दिख रहे हैं। कारण, रुपए की मजबूती विदेश से डॉलर में हुई होनेवाली समान आय को कम रुपए में बदल देगी। इन्हीं बातों के मद्देनजर संभावना इस बात की है कि इनफोसिस इस बार बोनस शेयर देने की घोषणा कर सकती है। आधार यहऔरऔर भी

जीवन बीमा कंपनियों के यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) पर नियंत्रण का झगड़ा शुक्रवार को अपने चरम पर पहुंच गया, जब सेबी ने साफ-साफ कह दिया कि उसके पास पंजीकरण कराए बगैर कोई बीमा कंपनी यूलिप या ऐसा कोई भी उत्पाद नहीं ला सकती है जिसमें बीमा के अलावा निवेश का भी हिस्सा हो। पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत सरन की तरफ से सुनाए गए 11 पेजों केऔरऔर भी

बेस रेट पर रिजर्व बैंक के अंतिम दिशा-निर्देश जारी, एक जुलाई से बीपीएलआर की व्यवस्था खत्म, शुरू होगी बेस रेट प्रणाली, दो लाख तक के ऋण पर ब्याज की बंदिश बैंकों से हटी, किसानों व गरीब तबकों के डीआरआई एडवांस पर बेस रेट की शर्तें लागू नहीं… पहली जुलाई 2010 से देश का कोई भी बैंक किसी भी ग्राहक को कैसा भी कर्ज एक निश्चित दर से कम ब्याज पर नहीं दे सकता। इस दर को बेसऔरऔर भी

भला आप सोच सकते हैं कि बाजार कैसे चलता है?  कल ग्रीस के संभावित डिफॉल्ट की खबर को हर तरफ अफरातफरी फैलाने में इस्तेमाल किया गया और पूरा बाजार मंदी की गिरफ्त में आ गया। अब, ऐसी चीजें तो होती रहती हैं और आगे भी होती रहेंगी। लेकिन अफरातफरी के माहौल में भी हमने अपना विश्वास बरकरार ही नहीं रखा, बल्कि बाजार में खरीद की कॉल दी। और, बाजार ने भी आज हमारी कॉल का मान रखा।औरऔर भी

बाजार में चर्चा चल निकली है कि अभी दाम ज्यादा चढ़े हुए हैं और अब करेक्शन या गिरावट आने को है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि फौरन ऐसा कुछ होनेवाला है। मैंने ब्लूमबर्ग पर काफी तेज किस्म के एक फंड मैनेजर की टिप्पणी पढ़ी। इसे पढ़ने के बाद मैं मानता हूं कि अभी किसी भी फंड मैनेजर के लिए मंदी या गिरावट की धारणा पाल लेना काफी जल्दबाजी होगी। वो यह गलती सेंसेक्स के 8000 अंक परऔरऔर भी

निवेशक खुद सीधे शेयर बाजार में पैसा लगाने की बजाय म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों से ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। यह बात साबित होती है पिछले एक साल में ऐसी स्कीमों द्वारा दिए गए रिटर्न से। पिछले एक साल में बीएसई का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स जहां करीब 70 फीसदी बढ़ा है, वहीं म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों का एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य0 152 फीसदी तक बढ़ा है। म्यूचुअल फंड के आंकड़े और शोध से जुड़ी संस्थाऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि इस सीजन में खरीदे जानेवाले लगभग 263 लाख टन गेहूं का 20 फीसदी हिस्सा खुले में रखना पड़ेगा क्योंकि देश में इसके भंडारण की उचित सुविधाएं नहीं हैं। पिछले साल गेहूं की सरकारी खरीद 254 लाख टन रही थी जो इस साल 9 लाख टन ज्यादा रहेगी। बता दें कि इस बार पंजाब व हरियाणा में गेहूं की बंपर फसल हुई है। सरकारी संस्था भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) केऔरऔर भी