कल हमने सूत्रों के हवाले से आपको बताया कि श्राडेर डंकन की विदेशी प्रवर्तक अमेरिकी कंपनी श्राडेर ब्रिजपोर्ट इंटरनेशनल कंपनी के भारतीय प्रवर्तक व चेयरमैन जे पी गोयनका की पूरी 24.50 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। वह इसके लिए प्रति शेयर मूल्य 324 रुपए देने को तैयार है। असल में इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाने के पीछे अमेरिका की कंपनी गेट्स का नाम आ रहा है। आज बीएसई में यह शेयर शुरुआती कारोबार में 149.85 रुपए परऔरऔर भी

सरकार अगले पांच सालों में सार्वजनिक क्षेत्र की 35 नई कंपनियों के आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) लाएगी और उन्हें शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराएगी। इस तरह के विनिवेश से केंद्र सरकार को कुल 1.5 लाख करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्यमंत्री अरुण यादव ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई (कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) के एक समारोह में यह जानकारी दी। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहाऔरऔर भी

इसमें कोई शक नहीं कि जब बाजार गिर रहा हो, तब आपको कुछ भी बताना बेकार है। वैसे भी, आप अपनी राय-विचार के लिए मीडिया व टीवी रिपोर्टों पर ही पूरी तरह निर्भर रहेंगे और कभी भी शेयर बाजार में निवेश नहीं करेंगे जबकि वह खुद बांहें पसारे आपको बुला रहा है, सस्ते भावों पर खरीद का मौका दे रहा है। इसलिए मैं तो आपसे कहूंगा कि इंतजार करो और देखते रहो। हां, जिन्हें मुझ पर भरोसाऔरऔर भी

सूत्रों से मिली जानकरी के मुताबिक श्राडेर डंकन की विदेशी प्रवर्तक अमेरिकी कंपनी श्राडेर ब्रिजपोर्ट इंटरनेशनल कंपनी के भारतीय प्रवर्तक व चेयरमैन जे पी गोयनका की पूरी 24.50 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। वह इसके लिए प्रति शेयर मूल्य 324 रुपए देने को तैयार है, जबकि अभी 10 रुपए अंकित मूल्य का इसका शेयर बीएसई में 127 रुपए चल रहा है। इस 24.50 फीसदी इक्विटी को लेने के बाद श्राडर डंकन में अमेरिकी प्रवर्तक कीऔरऔर भी

मुझे पता है कि कुछ ट्रेडर्स इतने थक और पक गए हैं कि वे अब भारतीय इक्विटी को लेकर उतना गंभीर नहीं रहे। मैं गुजरात में करीब 10,000 निवेशकों से मिला और मुझे अहसास हुआ कि उनमें से ज्यादातर शेयर बाजार के पक्ष में नहीं है। बस ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग करते हैं। यहां तक कि आज खरीदो, कल बेचो (बीटीएसटी) वाले खिलाड़ी भी थक गए हैं और लंबे समय से उन्होंने भी निफ्टी में शॉर्ट रहना,औरऔर भी

आईडीबीआई म्यूचुअल फंड अपने निवेशकों का आधार बढ़ाने के लिए ग्रामीण व कस्बाई इलाकों पर केंद्रित करेगा। इन इलाकों से वह 5 फीसदी नए निवेशक जोड़ना चाहता है। आईडीबीआई म्यूचुअल फंड को चलानेवाली एसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक व सीईओ कृष्णमूर्ति विजयन ने एक समाचार एजेंसी को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम समूचे देश में अपने निवेशक बनाना चाहते हैं। हम समझते हैं कि हमारी कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि हम टियर-2औरऔर भी

अमेरिकी बाजारों की गिरावट और हंगरी के संकट के बावजूद अगर बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 431 अंक तक गिर गया और बंद हुआ करीब 337 अंक की गिरावट के साथ तो इसमें बहुत परेशान होने की बात नहीं है। एनएसई निफ्टी में इसी तरह का करेक्शन आया है। ध्यान दें कि ऐसे हर करेक्शन के बाद बाजार ने वापसी की है और एनएसई निफ्टी पूरी दृढ़ता के साथ 5000 और 5100 का स्तर पार कर गया है। आजऔरऔर भी

हर चीज का एक खास व सही वक्त होता है पर हेल्थ इंश्योरेंस के लिए हर वक्त सही होता है। कहा जाता है कि सेहत है तो दौलत है और अपने जीवन का ठीक-ठाक बीमा करा लेने के तुरंत बाद हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने की जरूरत भी किसी नेमत से कम नहीं है। एक समय था जब हेल्थ इंश्योरेंस को सुरक्षित नहीं समझा जाता था। लोगों को जिस एक बीमा के बारे में जानकारी होती थी औरऔरऔर भी

शेयर बाजार में अगले कुछ सालों में पब्लिक इश्यू की बाढ़ आ सकती है क्योंकि सरकार ने तय कर दिया है कि किसी भी लिस्टेड कंपनी में पब्लिक होल्डिंग कम से कम 25 फीसदी होनी चाहिए। क्रिसिल इक्विटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय शेयर बाजारों में लिस्टेड 179 कंपनियों ऐसी हैं जिनमें पब्लिक होल्डिंग 25 फीसदी से कम हैं। अगर ये कंपनियां अपनी शेयधारिता सरकार की बताई सीमा में लाती हैं तो पूंजी बाजार मेंऔरऔर भी

बीमा नियामक प्राधिकरण, आईआरडीए (इरडा) बीमा उद्योग में व्याप्त मिस-सेलिंग को रोकने के उपाय करने जा रहा है। उसने इसके लिए पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा से संबंधित रेगुलेशन, 2002 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसमें सबसे खास बात यह है कि बीमा कंपनी को अपनी पॉलिसी बेचने से पहले निवेशक को कानूनी भाषा की जटिलता से बाहर निकलकर साफ-साफ बताना होगा कि वह कौन सा उत्पाद खरीदने जा रहा है और उसके क्या फायदे नुकसानऔरऔर भी