हमें अच्छा लगता है जब लोग कहते हैं कि बाजार महंगा चल रहा है। बाजार (सेंसेक्स) जब 8000 अंक पर था, तब कोई स्पष्टता नहीं थी। तब से लेकर अब तक 18,000 अक की पूरी यात्रा के दौरान वे यकीन के साथ खरीदने के मौके नहीं पकड़ सके। इसके बजाय हर बढ़त पर वे बेचते रहे। देखिए तो सही कि इस दौरान एफआईआई की होल्डिंग 20 से घटकर 16 फीसदी और रिटेल की 10 से घटकर 8औरऔर भी

हम साबित करने बैठे हैं कि बाजार के लिए हिन्डेनबर्ग या कोई दूसरा अपशगुन कभी कोई मायने नहीं रखता। न ही चार्टों के आधार पर की गई टेक्निकल एनालिसिस, खरीद-बिक्री की सलाह, ज्योतिष के नुस्खे और वैल्यूएशन के बारे में मंदी के आख्यान कोई काम आते हैं। आप खुद ही देखिए कि होंडा के अलग होने की खबर आ जाने के बाद भी सफेदपोश एनालिस्ट हीरो होंडा को मूल्यवान स्टॉक बताकर खरीदने की सलाह दिए जा रहेऔरऔर भी

यूं तो हाइपरटेंशन अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन पॉलिसीधारक इसके इलाज पर जो भी खर्च करता है, उसका क्लेम वह बीमा कंपनी से ले सकता है। यह फैसला है दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का। जस्टिस बी ए जैदी की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा है, “हाइपरटेंशन बीमारी नहीं, बल्कि मानव जीवन की सामान्य गड़बड़ी है जिसे दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। यह ऐसा कोई मर्ज नहीं है जिसके इलाज के लिए अस्पतालऔरऔर भी

देश में व्यावसायिक दुश्मनी के मामलों में इजाफा, कंपनियों को ग्रामीण व अशांत इलाकों में होनेवाली समस्याएं, अपहरण की बढ़ती वारदातों और भारतीय मालवाहक जहाजों को विदेशी समुद्री लुटेरों से पल-पल मंडराते खतरे के मद्देनजर आज के जमाने में अपहरण व फिरौती बीमा की जरूरत बढ़ने लगी है। और इस जरूरत को पूरा करती है किडनैपिंग एंड रैन्सम इंश्योरेंस पॉलिसी या छोटे में के एंड आर इंश्योरेंस पॉलिसी। बड़े काम की पॉलिसी: आज का कॉरपोरेट इंडिया इसऔरऔर भी

बड़े अफसोस की बात है कि छोटे हमेशा छोटा ही रहना चाहते हैं और उनमें बड़ा, समझदार व जानकार बनने की कोई इच्छा नहीं है। वे अपना दायरा तोड़ने को तैयार नहीं हैं। अब भी निवेश करने से पहले रिसर्च की अहमियत नहीं समझते। हमने ओएनजीसी के 800 रुपए रहने पर अपनी रिपोर्ट आपको दी होती तो रिसर्च की लागत आज शायद शून्य हो जाती। हम कोई सूचना सार्वजनिक होने से काफी पहले अपनी रिसर्च रिपोर्ट लेऔरऔर भी

पहली तिमाही में जीडीपी की विकास दर का 8.8 फीसदी रहना बाजार की उम्मीद के अनुरूप है। हमने तो सोचा था कि यह 8.5 फीसदी रहेगी, लेकिन भारत की विकासगाथा मद्धिम नहीं पड़ी है। शुक्रवार को ऑपरेटरों की तरफ से कुछ बिकवाली हुई थी। यह बात उनके इंटरव्यू में भी जाहिर हुई। लेकिन सोमवार को एफआईआई की खरीद बेरोकटोक जारी रही। बाजार के ऑपरेटर निफ्टी को गिराकर 5250 तक ले जाना चाहते हैं। इसलिए हमें इसके लिएऔरऔर भी

डीलर, ट्रेडर और ब्रोकर अपनी स्क्रीन रीडिंग के आधार पर बाजार का रुझान तय करते हैं। स्क्रीन तो दिखा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से एफआईआई की खरीद नदारद है। इसलिए बाजार नीचे फिसल रहा है और करेक्शन के लिए तैयार है। उनकी स्क्रीन रीडिंग से मुझे कोई इनकार नहीं। लेकिन यह अल्पकालिक तरीका है क्योंकि बाजार में अगर दो बजे खरीद शुरू होती है तो यही लोग इस तरह के सिद्धांत गढ़नेवाले अपने गुरुघंटालों काऔरऔर भी

हिन्डेनबर्ग की अशुभ छाया का डर बरकरार है। पूरे सितंबर भर रहेगा। दुनिया के बाजार गिरेंगे तो स्वाभाविक रूप से भारत पर भी असर पड़ेगा। वैसे भी हमारे एक बड़े फंड हाउस के प्रमुख कह चुके हैं कि बाजार में 10 फीसदी करेक्शन आना है। लेकिन कौन बेचेगा जिसके चलते यह करेक्शन आएगा? बीते शुक्रवार को बाजार (बीएसई सेंसेक्स) 1.25 फीसदी गिर गया। इस हिसाब से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सौदों के ओपन इंटरेस्ट में कमी आनी चाहिएऔरऔर भी

दो शब्दों के जादुई शब्द बीमा से दरअसल आपको अप्रत्याशित हालात में अपनी व परिवार की सुरक्षा करने में सहायता मिलती है। जीवन की राह में सुरक्षित चलने के लिए बीमा जरूरी भी है। यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान-यूलिप, टर्म इंश्योरेंस, होम इंश्योरेंस, पेंशन प्लान, सिंगल प्रीमियम प्लान, हेल्थ इंश्योरेंस व वाहन बीमा जैसे रूपों व योजनाओं में बीमा की विभिन्न पॉलिसियां आज बाजार में मौजूद हैं। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि इनकी खरीदारी लोग एजेंटऔरऔर भी

क्या सितंबर में बाजार के धराशाई होने का हिन्डेनबर्ग अपशगुन सही साबित होगा या यह लेखक जो कह रहा है कि हमारा बाजार इस दौरान नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा? इसका फैसला तो सितंबर 2010 के अंत ही हो पाएगा। आज वो मौका नहीं है कि मैं बताऊं कि आपको क्या करना चाहिए। बस, थोड़ा इंतजार कीजिए। हकीकत आपके सामने होगी। अभी तो आप वाकई अवांछित बातों और विचारों को सुन-सुनकर डरे हुए होंगे। ऐसे में मेराऔरऔर भी