इधर हर कोई सोने में चल रही तेजी की वजह यूरोप के ऋण संकट और अमेरिका में आई आर्थिक सुस्ती को बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के बाजार विश्लेषक क्लाइड रसेल का कहना है कि इसकी असली वजह दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीद के अलावा भारत व चीन के ग्राहकों की बढ़ी हुई मांग है जहां सोना खरीदना मुद्रास्फीति के बचाव के साथ-साथ स्टेटस सिम्बल भी बनता जा रहा है। क्लाइड रसेल काऔरऔर भी

देश में कुल 2547 वन ग्राम हैं। किसी भी वन ग्राम को राजस्‍व ग्राम में नहीं बदला गया है। असल में छह राज्यों ने वन ग्रामों को राजस्व गावों में बदलने के लिए 73 प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पास भेजे हैं। इसके लिए करीब 2.71 लाख हेक्टेयर वन भूमि को अनारक्षित करना पड़ेगा। केंद्र ने अब तक 511 वन ग्रामों को राजस्‍व ग्रामों में बदलने के लिए 40,986.81 हेक्‍टयर वन भूमि को अनारक्षित करने की सैद्धांतिकऔरऔर भी

वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी का मानना है कि हमारे यहां मुद्रास्फीति की एक वजह विकसित देशों की नीतियां हैं। उन्होंने बुधवार को राजधानी दिल्ली में बैंक ऑफ इंडिया के 106वें स्‍थापना दिवस समारोह में कहा, “भारत मुद्रास्फीति की जैसी चुनौती का सामना कर रहा है, उसकी आंशिक वजह विकसित देशों द्वारा अपने संकट से निपटने के लिए अपनाई गई नीतियां हैं।” वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रास्फीति को थामने की प्रतिबद्धता में हमें ब्याज दरें बढ़ानी पड़ीऔरऔर भी

मुंबई पुलिस ने स्पीक एशिया की प्रमुख हरेंदर कौर, भारतीय कामकाज के प्रमुख मनोज कुमार शर्मा, मुख्य मार्केटिंग अधिकारी विवेक गौतम व उभरते बाजारों के अध्यक्ष नारायणन राजगोपालन समेत सात बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। सिंगापुर से कंपनी का संचालन रही हरेंदर कौर फरार बताई जा रही है। मनोज कुमार शर्मा कहीं दुबई में छिपा पड़ा है, जबकि बाकी अन्य अधिकारी भी भागे-भागे फिर रहे हैं। स्पीक एशिया का सीओओ तारकऔरऔर भी

सरकार में डीजल के दाम तय करने को लेकर मतभेद बुधवार को उभर कर सामने आ गए, जब योजना आयोग ने डीजल के दाम को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का पक्ष लिया, जबकि भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार के सामाजिक दायित्व को देखते हुए डीजल पर सब्सिडी जारी रखने का समर्थन किया। राजधानी दिल्ली में सियाम (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स) के सालाना समारोह को संबोधित करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंहऔरऔर भी

ऑनलाइन मीडिया कंपनी याहू ने अपनी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कैरोल बार्त्ज को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। कैरोल को दो साल पहले कंपनी की स्थिति मजबूत करने के लिए लाया गया था। कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) टिमोठी मोर्स अंतरिम मुख्य कार्यकारी के रूप में काम करेंगे। लेकिन माना जा रहा है कि नेतृत्व में तब्दीली से याहू की मुश्किलें हल नहीं होने जा रही हैं। उसे दोबारा इंटरनेट की दुनिया में खुद कोऔरऔर भी

1. इक्विटी शेयर क्या है? इक्विटी शेयर को आम बोलचाल में शेयर या स्टॉक भी कहा जाता है। इससे किसी कंपनी में अमुक अंश की हिस्सेदारी व्यक्त होती है। इक्विटी शेयरधारक कंपनी के नफे-नुकसान में, अपने शेयरों की संख्या के अनुपात में व्यवसायिक हिस्सेदार होता है। इसके धारक को कंपनी के सदस्य का दर्जा प्राप्त होने के साथ कंपनी के प्रस्तावों पर अपना विचार व्यक्त करने और वोट देने का अधिकार प्राप्त है। 2. राइट्स इश्यू/राइट्स शेयरऔरऔर भी

सरकार ने कहा है कि स्विटजरलैंड समेत दस देश अपने यहां भारतीयों द्वारा जमा कराए गए काले धन के बारे में जानकारी देने को तैयार हैं। वित्त राज्यमंत्री एस एस पलानी मणिक्कम ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार सूचना के प्रभावी आदान-प्रदान के लिए उपयुक्त कानूनी ढांचा तैयार कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत और स्विटजरलैंड ने दोहरा कराधान निषेध संधि को संशोधित करने वाले प्रोटोकॉल परऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने नेफेड और एनसीसीएफ (नेशनल कंज्यूमर्स को-ऑपरेटिव फेडरेशन) से कहा है कि वे प्‍याज की कीमतों को नि‍यंत्रि‍त करने के लि‍ए फौरन बाजार में हस्‍तक्षेप करें। खाद्य राज्यमंत्री के वी थॉमस का निर्देश है कि दोनों एजेंसि‍यों के बि‍क्री केंद्र 20 रुपए कि‍लो की दर से प्याज बेचेंगे। राज्‍य सरकारों से भी आग्रह कि‍या गया है कि‍ वे अपनी एजेंसि‍यों के माध्‍यम से बाजार में इसी तरह के कदम उठाएं। लेकिन मंत्री महोदय को शायदऔरऔर भी

बैंकों के लिए अपनी जमा का इतना बड़ा हिस्सा सरकारी बांडों में लगाना क्यों जरूरी है? यह मुद्दा उछाल दिया है खुद रिजर्व बैंक के गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने। उन्होंने मंगलवार को मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड के एक समारोह में कहा कि बैंकों द्वारा सरकारी बांडों में निवेश करने के लिए तय न्यूनतम जमा का अनिवार्य अनुपात धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए। जानकारों को लगता है कि ऐसा हो गया तो बाजार में सरकारीऔरऔर भी