पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने तय किया है कि किसी भी नए एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) और उनके सब-एकाउंट को पंजीकरण के समय यह घोषणा करनी पड़ेगी कि वह चंद निवेशकों के लिए काम करनेवाली पीसीसी (प्रोटेक्टेड सेल कंपनी) या एसपीसी (सेग्रिगेटेड पोर्टफोलियो कंपनी) नहीं हैं और न ही दूसरा नाम रखकर वह ऐसा कोई काम करता है। साथ ही अगर कोई एफआईआई व्यापक निवेशकों के आधार वाले एमसीवी (मल्टी क्लास वेहिकल) के रूप में कामऔरऔर भी

अभी देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के सस्ते होमलोन की स्कीम 30 अप्रैल तक बढ़ाने के जवाब में किसी भी दूसरे बैंक को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था कि आज देश की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी एचडीएफसी ने धमाका कर दिया। उसने दोहरी ब्याज दर वाली होमलोन की नई स्कीम पेश कर दी है। इसके तहत 31 मार्च 2011 तक ग्राहक से 8.25 फीसदी सालाना ब्याज लिया जाएगा और फिर 1 अप्रैल 2011 सेऔरऔर भी

ज्यादातर भारतीय म्यूचुअल फंड में निवेश करने से घबराते हैं। ऐसा इसलिए कि एक तो उन्हें इसमें भारी जोखिम नजर आता है, दूसरे वे जानते ही नहीं कि निवेश का यह माध्यम काम कैसे करता है। यह बात रिसर्च व विश्लेषण से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय फर्म बोस्टन एनालिटिक्स की ताजा रिपोर्ट से सामने आई है। बोस्टन एनालिटिक्स ने पिछले महीने देश के 15 शहरों में तकरीबन 10,000 लोगों से बातचीत के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। रिपोर्ट काऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी की तरफ से 14 जीवन बीमा कंपनियों को कोई भी नया यूलिप प्लान लाने से रोक दिए जाने के बावजूद न तो बीमा क्षेत्र के नियामक आईआरडीए और न ही निजी बीमा कंपनियों में कोई खलबली मची है। आईआरडीए के आला अफसर छुट्टी मना रहे हैं। जीवन बीमा कंपनियों के साझा मंच लाइफ इंश्योरेंस काउंसिल की तरफ से उसके प्रमुख एस बी माथुर ने इतना भर कहा है कि मौजूदा यूलिपधारकों कोऔरऔर भी

हमारी पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) लगता है मनबढ़ हो गई है। अभी वित्त मंत्रालय की मध्यस्थता में यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) पर बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए से हुई सहमति को एक दिन भी नहीं बीते हैं कि उनसे 9 अप्रैल के विवादास्पद आदेश से ही नया पंगा निकाल दिया है। उसका कहना है कि जिन 14 जीवन बीमा कंपनियों को उसने यूलिप के लिए सेबी में पंजीकरण जरूरी करने कीऔरऔर भी

ठीक एक हफ्ते बाद आज ही के दिन भारतीय रिजर्व बैंक नए वित्त वर्ष 2010-11 की सालाना मौद्रिक नीति घोषित करेगा। इसलिए वह क्या करेगा क्या नहीं, इसको लेकर कयासों का दौर तेज होने लगा है। आज वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाओं के सचिव आर गोपालन ने कहा कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति थोड़ा और कठोर बना सकता है। वे राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से बात कर रहे थे। बता दें कि रिजर्व बैंक स्वायत्त नियामकऔरऔर भी

आप किसी भी जीवन बीमा कंपनी से कोई भी यूलिप पॉलिसी खरीदिए चाहे बच्चों के लिए, चाहे अपने बुढ़ापे की पेंशन के लिए, उसके दस्तावेज में सबसे ऊपर लिखा रहता है कि ‘इस पॉलिसी के अंतर्गत निवेश पोर्टपोलियो में निवेश का सारा जोखिम पॉलिसीधारक का है।’ यूलिप में प्रीमियम का तकरीबन 98 हिस्सा इक्विटी या ऋण प्रपत्रों में लगाया जाता है। यही वजह है कि 2008 में शेयर बाजार में गिरावट के बाद यूलिप में पॉलिसीधारकों काऔरऔर भी

पूंजी बाजार की नियामक संस्था सेबी और बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था आईआरडीए में अपने हलके को लेकर तलवारें खिंच चुकी हैं। अभी तक आईआरडीए को यकीन था कि जीवन बीमा कंपनियों की तरफ से जारी बीमा कवर व निवेश पर फायदे का लाभ देनेवाले यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) पर केवल उसी का नियंत्रण चलेगा। लेकिन शुक्रवार को देर शाम सेबी ने आदेश सुना दिया कि कोई भी बीमा कंपनी बिना उससे रजिस्ट्रेशन लिए न तोऔरऔर भी

जीवन बीमा कंपनियों के यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) पर नियंत्रण का झगड़ा शुक्रवार को अपने चरम पर पहुंच गया, जब सेबी ने साफ-साफ कह दिया कि उसके पास पंजीकरण कराए बगैर कोई बीमा कंपनी यूलिप या ऐसा कोई भी उत्पाद नहीं ला सकती है जिसमें बीमा के अलावा निवेश का भी हिस्सा हो। पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत सरन की तरफ से सुनाए गए 11 पेजों केऔरऔर भी

देश में सक्रिय दुनिया की चार ऑडिट फर्में ऐसे-ऐसे काम भी कर रही हैं जिनकी उन्हें इजाजत नहीं दी गई है। यह कहना है देश में एकाउंटिंग व ऑडिटिंग की नियामक संस्था आईसीएई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंटट्स ऑफ इंडिया) की एक शीर्ष समिति का। आईसीएआई के पूर्व अध्यक्ष उत्तम प्रकाश अग्रवाल की अगुआई में बनी इस समिति का कहना है कि प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स, केपीएमजी, अर्न्स्ट एंड एंग और डेलॉइटे को देश में कंसलटेंसी सेवाएं देने कीऔरऔर भी