बाज़ार गिरता ही जा रहा है। निफ्टी-50 सूचकांक ने इसी साल 2 अप्रैल 2026 को 22,182.55 पर 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर पकड़ा था। इससे साल भर पहले वो 7 अप्रैल 2025 को 21,743.65 तक गिरा था। अभी 1 अक्टूबर 2026 को नीचे में 22,217.30 चला गया। 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर से मात्र 34.75 अंक दूर। हो सकता है कि नए हफ्ते की शुरुआत निफ्टी के नए न्यूनतम स्तर से हो। भारतीय बाज़ार के इस तरह गिरते जाने की पांच खास वजहें गिनाई जा रही हैं। अमेरिका में दस साल के बॉन्ड पर यील्ड 5.25% पर पहुंच चुकी है। कच्चा तेल थोड़ा दबने के बावजूद 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 तक गिरा तो संभल नहीं रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारत से भागना जारी है। पांचवीं वजह है कि भारतीय कंपनियों का मुनाफा घट रहा है और आगे भी इसके बढ़ने की उम्मीद नहीं है। लेकिन इन वजहों को कोरिया, ताइवान, जापान, चीन, ब्रिटेन व हांगकांग के संदर्भ में देखा जाए जिनके शेयर बाज़ार पिछले दो साल में क्रमशः 157%, 108%, 54%, 31%, 27% व 18% बढ़े हैं, जबकि भारतीय बाज़ार बढ़ने के बजाय 23% से ज्यादा गिरा है। भारत की चमक इतनी फीकी क्यों? अब तथास्तु में आज की कंपनी…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
