सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जिसमें पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन के पद पर यू के सिन्हा की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। यह याचिका भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस कृष्णास्वामी, रिटायर्ड आईपीएस अफसर जुलियो रिबेरो और सीबीआई के पूर्व निदेशक बी आर लाल की तरफ से दायर की गई है। याचिका पर गौर करते हुए मुख्य न्यायाधीश एस एच कापड़िया की पीठ नेऔरऔर भी

रुपए में कमजोरी का सिलसिला जारी है। डॉलर के सापेक्ष उसकी विनियम दर सोमवार को दोपहर तीन बजे के आसपास 1/52 रुपए से नीचे चली गई। 5 मार्च 2009 के बाद पहली बार रुपया इतना नीचे गिरा है। शाम पांच बजे तक एमसीएक्स एसएक्स में एक डॉलर की दर 52.27 रुपए हो गई, वहीं दिसंबर फ्यूचर्स का भाव 52.50 रुपए रहा है। अगर बाजार की मानें तो जून 2012 तक डॉलर/रुपए की विनिमय दर 53.20 रुपए होऔरऔर भी

खरबपति निवेशक वॉरेन बफेट का कहना है कि यूरोप के ऋण संकट ने 17 सदस्यीय यूरोज़ोन की बुनियादी कमजोरी को उजागर किया है और महज बयानबाजी व घोषणाओं ने इसे नहीं सुलझाया जा सकता। सोमवार को जापान के दौरे के पहले बफेट ने सीएनबीसी से हुई बातचीत में कहा, “यह यूरो सिस्टम की प्रमुख व बुनियादी गड़बड़ी है। मैं जानता हूं कि अभी जो व्यवस्था चल रही है, उसमें बड़ी खामी है और यह खामी महज शब्दोंऔरऔर भी

शुक्रवार को शेयर बाजार में मिड कैप व स्मॉल कैप कंपनियों को तगड़ा झटका लगा। यूं तो सेंसेक्स व निफ्टी में क्रमशः 0.55 फीसदी और 0.59 फीसदी की ही गिरावट आई है, लेकिन 137 मिड व स्मॉल कैप कंपनियों के शेयर अब तक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए, जबकि 343 कंपनियों पर निचला सर्किट ब्रेकर लगा। अगर ये सर्किट ब्रेकर न होते तो न जाने उनमें कितनी गिरावट आ जाती। बाजार के कारोबारियों का कहना हैऔरऔर भी

इसे बढ़ी हुई ब्याज दरों का असर कहें या औद्योगिक सुस्ती का नतीजा, लेकिन आंकड़े गवाह हैं कि इस साल औद्योगिक क्षेत्र को बैंकों से मिले ऋण में अभी तक पिछले साल के मुकाबले 55,138 करोड़ रुपए कम बढ़त हुई है। चालू वित्त वर्ष 2011-12 में 4 नवंबर तक बैंकों द्वारा दिया गया गैर-खाद्य ऋण या दूसरे शब्दों में मैन्यूफैक्चरिंग व उपभोक्ता क्षेत्र को दिया गया ऋण 2,25,211 करोड़ रुपए बढ़ा है, जबकि बीते वित्त वर्ष 2010-11औरऔर भी

सरकार को देश के रिटेल व छोटे निवेशकों को शेयर बाजार में खींचकर लाने में भले ही कामयाबी न मिल रही हो, लेकिन हमारा वित्त मंत्रालय विदेश के रिटेल व छोटे निवेशकों को यहां ट्रेड करने की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। इससे पहले चालू वित्त वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विदेशी निवेशकों को म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों में निवेश की अनुमति देने का ऐलान किया था। इस परऔरऔर भी

कमजोर होती यूरोप मुद्रा यूरो और देश के भीतर कॉरपोरेट क्षेत्र व तेल कंपनियों की तरफ से डॉलर की मांग बढ़ती जा रही है तो रुपया गिरता चला जा रहा है। मंगलवार को एक डॉलर 50.76 रुपए का हो गया है जो 31 मार्च 2009 के बाद के 32 महीनों में रुपए का सबसे कमजोर स्तर है। सोमवार को यह डॉलर के सापेक्ष 50.285/295 रुपए पर बंद हुआ था। मंगलवार को रिजर्व बैंक की संदर्भ दर 50.5645औरऔर भी

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल इंडिया में अगले वित्त वर्ष के दौरान 10% हिस्सेदारी बेच सकती है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमें फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर के लिए तैयार रहने को कहा गया है। फिलहाल ऑयल इंडिया की इक्विटी में सरकार की 78.4% हिस्सेदारी है। ऑयल इंडिया का विनिवेश सरकार द्वारा तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की 5% हिस्सेदारी बेचने के बाद किया जाएगा। ओएनजीसी के शेयरों की बिक्री दिसंबर में होनेऔरऔर भी

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इस समय देश के भीतर और दुनिया के वित्तीय बाजारों में जैसी अनिश्चितता चल रही है, उसकी वजह से भारतीयों ने शेयर बाजार में निवेश बेहद घटा दिया है। वैश्विक स्तर की निवेश व सलाहकार फर्म मॉरगन स्टैनले की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चालू साल 2011 में भारतीय लोगों ने अपनी कुल आस्तियों का बमुश्किल 4 फीसदी इक्विटी बाजार में लगा रखा है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले चालीस सालों में इतना कम निवेश केवल दोऔरऔर भी

यूरोप के दो संकटग्रस्त देशों में हुए नए घटनाक्रम ने दुनिया के बाजारों में नया उत्साह भर दिया है। जहां ग्रीस में शुक्रवार को लुकास पापाडेमॉस ने अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली, वहीं इटली में संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने लंबे समय से अधर में लटके आर्थिक सुधार पैकेज को मंज़ूरी दे दी। पापाडेमॉस के नेतृत्व में ग्रीस की नई अंतरिम गठबंधन सरकार यूरोपीय देशों की ओर ग्रीस को मिलने वाली आर्थिक मददऔरऔर भी