केंद्रीय उत्‍पाद व सीमा शुल्‍क बोर्ड (सीबीईसी) कागज पर कामकाज को खत्‍म कर वेब आधारित संचार को बढ़ावा देगा। बोर्ड ने इस आशय की एक पर्यावरण रणनीति तैयार की है, जिसे मंगलवार को केंद्रीय वित्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंज़ूरी दे दी। इस नीति से देश भर में सीमा शुल्‍क, केंद्रीय उत्‍पाद शुल्क व सेवा कर के अधिकारियों के कामकाज में काफी बदलाव आने की उम्मीद है। सीबीईसी की पर्यावरण रणनीति के अंतर्गत ‘भारतीय सीमा शुल्‍क काऔरऔर भी

जुलाई महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 9.22 फीसदी रही है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों से यह बात उजागर हुई है। मुद्रास्फीति की दर इसके ठीक पिछले महीने जून में 9.44 फीसदी और ठीक साल भर पहले जुलाई 2010 में 9.98 फीसदी थी। ऊपर से मुद्रास्फीति में कमी थोड़ा राहत का सबब दिखती है। लेकिन वित्त मंत्रालय को ऐसी कोई गफलत नहीं है। मंत्रालय के मुख्यऔरऔर भी

देश के केवल 3% लोग ही इनकम टैक्स देते हैं। वित्त वर्ष 2009-10 (आकलन वर्ष 2010-11) में कुल 3.13 करोड़ लोगों से आयकर दिया है। अगले साल 2012 से प्रत्यक्ष कर संहिता लागू होने के बाद भी भारतीय करदाताओं की संख्या कमोबेश इतनी रहेगी क्योंकि साल भर में दो लाख से ज्यादा करयोग्य आमदनी वाले लोगों की संख्या करीब-करीब इतनी ही है। वैसे, सरकार के लिए कर जुटाना अब सस्ता होता जा रहा है। 2009-10 में करऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति एक बार दहाई के खतरनाक आंकड़े की तरफ बढ़ने लगी है। वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 30 जुलाई 2011 को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर 9.90 फीसदी दर्ज की गई है। इससे पिछले सप्ताह यह 8.04 फीसदी और उससे पहले पिछले सप्ताह 7.33 फीसदी ही थी। वैसे तसल्ली की बात यह है कि साल भर पहले इसी दौरान मुदास्फीति की दर 16.45औरऔर भी

देश के निर्यात में जुलाई माह के दौरान 81.8 फीसदी की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है और यह 29.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में गुरुवार को मीडिया को यह जानकारी दी। जुलाई में आयात 51.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 40.4 अरब डॉलर का रहा है। माह के दौरान व्यापार घाटा 11.1 अरब डॉलर का रहा। खुल्लर का कहना था कि निर्यात का प्रदर्शन अच्छा रहा है। लेकिनऔरऔर भी

स्विस बैंकों में जमा भारतीयो का धन पिछले पांच सालों में लगातार घटता रहा है और इसकी मौजूदा रकम दस हजार करोड़ रुपए से भी कम है। 2006 में यह राशि 23,373 करोड़ रुपए थी। वहीं 2010 तक यह आधे से भी ज्यादा घटकर 9295 करोड़ रुपए पर आ गई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने स्विस नेशनल बैंक के आंकड़ों को उद्धृत करतेऔरऔर भी

इस साल जून महीने में देश में आया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 565.6 करोड़ डॉलर रहा है। यह पिछले साल जून में आए 138 करोड़ डॉलर के निवेश से जहां लगभग 310 फीसजी ज्यादा है, वहीं 2000-01 के बाद के पिछले ग्यारह वित्त वर्षों में किसी भी महीने में आया दूसरा सबसे ज्यादा एफडीआई है। यह तथ्य एफडीआई के रूप में आई इक्विटी पर रिज़र्व बैंक की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों से उजागर हुआ है। इनऔरऔर भी

अभी कुछ दिन पहले तक जो सरकार बढ़ती महंगाई के बीच राजनीतिक बवाल के डर से डीजल के मूल्यों को छेड़ने से डर रही थी, उसे विपक्ष ने ऐसा मौका दे दिया है कि वह बड़े उत्साह से इस पर मूल्य नियंत्रण उठाने की तैयारी में जुट गई है। इसका सबसे पहला वार उन लोगों पर होगा जो डीजल से चलनेवाली कारें इस्तेमाल करते हैं। लोकसभा में महंगाई पर चल रही बहस का जवाब देते हुए वित्तऔरऔर भी

देश जबरदस्त विरोधाभास से जूझ रहा है। खाद्यान्नों के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर थमने का नाम नहीं ले रही। 16 जुलाई को खत्म हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति नवंबर 2009 से बाद के सबसे न्यूनतम स्तर 7.33 फीसदी पर थी। लेकिन 23 जुलाई को खत्म हफ्ते मे यह फिर से बढ़कर 8.04 फीसदी पर पहुंच गई है। वैसे साल भर पहले तो और भी भयंकर स्थिति थीऔरऔर भी

लोकसभा में मुद्रास्फीति या महंगाई पर बहस जारी है। उम्मीद है कि गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर मुद्रास्फीति पर चिंता जताई जाएगी और सरकार से कहा जाएगा कि वह कीमतों पर काबू पाने के लिए कुछ और कदम उठाए। लेकिन बुधवार को सांसदों ने महंगाई के मसले पर जिस तरह शब्दों की तीरंदाजी दिखाई है, उसने साबित कर दिया है कि हमारे सांसद आर्थिक मामलों में कितने ज्यादा निरक्षर हैं। वह भी महंगाई जैसे मसले परऔरऔर भी