वित्‍त मंत्री प्रणब मुखर्जी का मानना है कि हमारे यहां मुद्रास्फीति की एक वजह विकसित देशों की नीतियां हैं। उन्होंने बुधवार को राजधानी दिल्ली में बैंक ऑफ इंडिया के 106वें स्‍थापना दिवस समारोह में कहा, “भारत मुद्रास्फीति की जैसी चुनौती का सामना कर रहा है, उसकी आंशिक वजह विकसित देशों द्वारा अपने संकट से निपटने के लिए अपनाई गई नीतियां हैं।” वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रास्फीति को थामने की प्रतिबद्धता में हमें ब्याज दरें बढ़ानी पड़ीऔरऔर भी

सरकार में डीजल के दाम तय करने को लेकर मतभेद बुधवार को उभर कर सामने आ गए, जब योजना आयोग ने डीजल के दाम को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का पक्ष लिया, जबकि भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार के सामाजिक दायित्व को देखते हुए डीजल पर सब्सिडी जारी रखने का समर्थन किया। राजधानी दिल्ली में सियाम (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स) के सालाना समारोह को संबोधित करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंहऔरऔर भी

देश की आर्थिक विकास दर जून तिमाही में पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम रही है। फिर भी यह सबसे ज्यादा आशावादी अनुमान से भी बेहतर है। इसीलिए शेयर बाजार पर जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास दर कम रहने का असर नहीं पड़ा और वह करीब 1.6 फीसदी बढ़ गया। हालांकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने जून तिमाही की विकास दर को निराशाजनक करार दिया है। मंगलवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिकऔरऔर भी

अगर भारत इसी तरह बढ़ता रहा और आर्थिक ताकत हासिल करता रहा तो हम दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए स्थिरता का स्रोत बन सकते हैं और बेचैन भटक रही वैश्विक पूंजी का सुरक्षित ठिकाना बन सकते हैं। यह आशा जताई है वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने। उन्होंने सोमवार को राजधानी दिल्ली में भारतीय आर्थिक सेवा के स्वर्ण जयंती समारोह में यह बात कही। वित्त मंत्री ने कहा कि आज जैसी वैश्विक जिम्मेदारी है, भारत के ऊपर पिछलेऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने नवंबर 2008 से देश में जन औषधि मेडिकल स्टोर खोलने का अभियान चला रखा है। ये स्टोर मुख्यतया सरकारी अस्पतालों में खोले जाने हैं। लेकिन तीन साल तक इस योजना के तहत देश भर में कुल 111 स्टोर ही खोले जा सके हैं, जिनमें से सात काम नहीं कर रहे हैं। नोट करने की बात यह है कि इनमें से कोई भी स्टोर देश के तीन प्रमुख राज्यों – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश वऔरऔर भी

देश के सबसे ज्यादा गरीब 12 राज्यों में से किसी को भी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) में दिलचस्पी नहीं है। इस मिशन का संचालन केंद्र सरकार विश्व बैंक के साथ मिलकर कर रही है और इसके लिए विश्व बैंक ने 4600 करोड़ रुपए का उधार देने का करार किया है। राज्यों के इस ठंड रवैये की जानकारी केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन ने शुक्रवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। उन्होंनेऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति 13 अगस्त को खत्म हफ्ते के दौरान एक बार फिर दहाई अंक के करीब 9.80 फीसदी पर पहुंच गई। खाद्य वस्तुओं की मंहगाई दर में यह बढ़ोतरी खासकर प्याज, टमाटर, फल व दूध, अंडा और मछली जैसे प्रोटीन के स्रोत वाली चीजों की कीमतों के दबाव के कारण हुई। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति इससे पिछले सप्ताह 9.03 फीसदी पर थी। एक साल पहले इसी अवधि में खाद्य मुद्रास्फीति 14.56 फीसदी थी। सरकारऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय सर्विस टैक्स के बारे में ऐसी सूची तैयार कर रहा है, जिसके बाहर की सभी सेवाओं पर टैक्स लगाया जाएगा। इसे निगेटिव लिस्ट या निषेध सूची का नाम दिया गया है। प्रस्तावित जीएसटी (माल व सेवा कर) की नई प्रणाली लागू हो जाने के बाद इस सूची की अहमियत बढ़ जाएगी। इसी के मद्देनजर सरकार यह सूची तैयार कर रही है। लेकिन सरकार की तात्कालिक चिंता यह है कि देश में पंजीकृत कुल 15 लाखऔरऔर भी

सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आवश्यक वस्तुओं को निर्धारित लोगों तक पहुंचाने के लिए हरियाणा व चंडीगढ़ में स्मार्ट कार्ड योजना प्रायोगिक आधार पर शुरू कर दी है। इस योजना के तहत वर्तमान राशन कार्डों को स्‍मार्ट कार्ड से बदला जा रहा है। उपभोक्‍ता मामलात, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री के वी थॉमस ने लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) की कार्यक्षमताऔरऔर भी

खाद्य मुद्रास्फीति की दर 6 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान थोड़ा घटकर 9.03 फीसदी पर आ गई। इससे ठीक पिछले हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की यह दर 9.90 फीसदी थी। लेकिन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि 9 फीसदी से ऊपर चल रही खाद्य मुद्रास्फीति स्वीकार्य नहीं है। हालांकि आगे इससे कुछ राहत मिल सकती है। वित्त मंत्री ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि 9 फीसदीऔरऔर भी