सब ठाट धरा रह जाएगा
सतह के नीचे, समय के पार बहुत कुछ घटता रहता है, हम नहीं देख पाते। सूरज छिपता है, खत्म नहीं होता। शांत पृथ्वी के भीतर चट्टानें दरकती हैं, जलजला आता है। सावधान! शांतिभंग का खतरा है, किसान अशांत हैं।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
सतह के नीचे, समय के पार बहुत कुछ घटता रहता है, हम नहीं देख पाते। सूरज छिपता है, खत्म नहीं होता। शांत पृथ्वी के भीतर चट्टानें दरकती हैं, जलजला आता है। सावधान! शांतिभंग का खतरा है, किसान अशांत हैं।और भीऔर भी
जो स्थिर है, बैठा है, चलता नहीं, वह गलता है। जो गतिशील है, चलता है, वही दोषों से मुक्ति पाकर शुद्ध व समर्थ बनता है। उपनिषद तक यही कहते हैं। इसलिए ठहरने का बहाना नहीं, चलने की राह खोजनी चाहिए।और भीऔर भी
याददाश्त जितनी छोटी होती जाती है, हमारे अहसास उतने लंबे होते चले जाते हैं। हमारे लिए हमारा पूरा जीवन उसी छोटी पोटली में सिमट जाता है। लगता ही नहीं कि इसके अलावा भी हमने कुछ और देखा-परखा है।और भीऔर भी
व्यक्तिगत जीवन में गड़े मुर्दे उखाड़ने का कोई मतलब नहीं होता। लेकिन देश के जीवन में इतिहास और उससे जुड़े ‘महात्माओं’ का निर्मम मूल्यांकन जरूरी होता है, उन्हें कब्र तक से खोदकर निकालना पड़ता है।और भीऔर भी
ज़िंदगी को संवारने में बड़ी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस बीच थकने-हारने पर रोना आए तो रो लेना चाहिए जी भर। आखिर रोने में क्या बुराई! रोने से मन हल्का होता है और हल्का मन उड़ने लगता है, हल्के-हल्के।और भीऔर भी
ठगों से भरी बस्ती में किसी पर विश्वास करना घातक है। तो क्यों न बस्ती ही बदल दी जाए? ऐसा संभव है क्योंकि सहज विश्वास मूल मानव स्वभाव है, जबकि ठगी समाज की देन है। और, समाज को बदला जा सकता है।और भीऔर भी
हम सांप को रस्सी न समझें, जो चीज जिस रूप में है, उसे उसी रूप में देखें – यह अवस्था हासिल करना ध्येय है हमारा। नहीं तो अपने पूर्वाग्रहों के चलते हम सच को नहीं देख पाएंगे और हकीकत हमें मुंह चिढ़ाती रहेगी।और भीऔर भी
कुछ न जानने पर भी काम तो चल ही जाता है। लेकिन जानने से जिंदगी आसान हो जाती है। मानव समाज के अब तक के संघर्षों से हासिल लाभ हमें मिल जाता है और हम तमाम फालतू परेशानियों से बच जाते हैं।और भीऔर भी
जब आप किसी काम के इश्क में पड़ जाते हो तो कोई भी बाधा या विफलता आपको नहीं रोक पाती। दिल से ठान लेना ही आधी से ज्यादा सफलता की गारंटी है। बाकी तो गंगा अपने बहने की राह खुद खोज लेती है।और भीऔर भी
आप प्रतिकूलताओं से घिरे हैं तो भाग्यशाली हैं क्योंकि इनके बीच ही हमारी सोई शक्तियां जगती हैं। सब ठीक हो तो नई अनुभूति नहीं मिलती। और, अनुभूति ही तो पूंजी है। बाकी तो सभी को विदा खाली हाथ ही होना है।और भीऔर भी
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