अमरत्व की कुंजी
इंसान अमर नहीं हो सकता। अमरत्व की कोई घुट्टी भी आज तक न तो बनी है और न ही आगे बनेगी। लेकिन इंसान की रचना अमर हो सकती है। इसलिए जीते जी ऐसा कुछ रच देना चाहिए तो हमारे बाद भी ज़िंदा रहे।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
इंसान अमर नहीं हो सकता। अमरत्व की कोई घुट्टी भी आज तक न तो बनी है और न ही आगे बनेगी। लेकिन इंसान की रचना अमर हो सकती है। इसलिए जीते जी ऐसा कुछ रच देना चाहिए तो हमारे बाद भी ज़िंदा रहे।और भीऔर भी
जटिलता तभी तक है जब तक बीच में अटके हैं। समझा नहीं है। तह तक पहुंचने पर सब आसान हो जाता है। सबसे अच्छा विचार सबसे सरल होता है। ज्ञान के सागर का सारा सार प्रेम का ढाई आखर ही होता है।और भीऔर भी
कोटर से रह-रह कर बाहर झांकने से कुछ नहीं होगा। बाहर खिलंदड़ी मची है। हर रंग खिल रहे हैं। सब कुछ है। लेकिन आपके बिना बहुत कुछ अधूरा है। कोटर में आप भी अधूरे हैं तो बाहर छलांग क्यों नहीं लगाते जनाब!और भीऔर भी
हम सभी अर्जुन हैं और कृष्ण भी। सोते हैं तो अर्जुन होते हैं और जगते हैं तो कृष्ण। सोते वक्त भाव व भावनाएं बेलगाम भटकती हैं। जगने पर सारथी के डोर खींचते ही सब अपनी-अपनी जगह समा जाती हैं।और भीऔर भी
किसी के मान लेने से कोई गिनती नहीं बन जाता। हम में हर कोई अपने मन का राजा है। किसी से कम नहीं। शायद हर जानवर भी खुद को अनोखा समझता होगा। वैसे, हर गिनती भी तो अपने-आप में अनोखी होती है।और भीऔर भी
सच-झूठ के बीच कभी रहा होगा काले-सफेद या अंधेरे उजाले जैसा फासला। लेकिन अब यह फासला इतना कम हो गया है कि कच्ची निगाहें इसे पकड़ नहीं सकतीं। जौहरी की परख और नीर-क्षीर विवेक पाना जरूरी है।और भीऔर भी
हमारे शरीर में एक स्वतंत्र प्रणाली बराबर काम करती है। चेतना कोई फैसला करे, दिमाग इससे पहले ही फैसला कर चुका होता है। लेकिन इंसान होने का लाभ यह है कि चेतना दिमाग के फैसले को पलट भी सकती है।और भीऔर भी
कायर से गठजोड़ कभी न करो क्योंकि वह सिर्फ अपनी चमड़ी देखता है। किसी की परवाह नहीं करता। उसके हाथ में सत्ता हो तो उसे तानाशाह बनते देर नहीं लगती। कमाल तो यह है कि लोग उसे बहादुर समझते हैं।और भीऔर भी
जो कल सही था, आज भी सही हो, जरूरी नहीं। विचार या व्यक्ति का सही होना तय करती है प्रासंगिकता। हर वस्तु व इंसान की तरह विचार का भी जीवनकाल होता है। हर विचार को नया जन्म लेना ही पड़ता है।और भीऔर भी
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