वह जमाना अब नहीं रहा, जब कम बोलना अच्छा माना जाता था। आजकल तो सफलता उन लोगों के कदम चूमती है, जो बेहतरीन शब्दों में बेहतरीन ढंग से अपने काम का बखान कर सकते हैं।और भीऔर भी

संविधान में संशोधन का अधिकार सिर्फ सरकार को है, जनता को नहीं। जनता जब संविधान में बदलाव की बात करती है तो राष्ट्रद्रोही तक करार दी जाती है। फिर, आखिर किन गणों का गणतंत्र है यह?और भीऔर भी

आदमी को वहीं से उठना चाहिए जहां वह गिरता है। जीवन में यही नियम लागू होता है। जो गिरते कहीं और हैं और उठना कहीं और से चाहते हैं वे कभी खड़े नहीं हो पाते, दौड़ना तो बहुत दूर की बात है।और भीऔर भी

सोचिए, आपके फैसले कोई दूसरा कैसे ले सकता है! अपने फैसले खुद लेने की आदत डालें और उसकी जवाबदेही भी लें। तभी आप गलत फैसलों से सही फैसलों तक पहुंचने का हुनर सीख पाएंगे।और भीऔर भी

किराये का मकान है। यहां अपनी निशानियां पीछे छोड़कर क्यों जाने का? न जाने कैसे लोग आएं, इनके साथ क्या सलूक करें, क्या पता! इसलिए सब कुछ समेट लेने का, एक-एक निशान मिटा देने का।और भीऔर भी

अध्यात्म कहता है अपने को जानो। निवेश का मूल सिद्धांत भी कहता है अपने को जानो। जानो कि कितना जोखिम उठा सकते हो, अभी व बाद की जरूरतें हैं क्या हैं, लक्ष्य बनाओ। तब निवेश करो।और भीऔर भी

आज के जमाने में अतीत की धौंस का कोई मतलब नहीं है। आप क्या थे या क्या रह चुके हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मायने यह रखता है कि आप अभी क्या हैं और आगे क्या हो सकते हैं।और भीऔर भी

आत्मा के बिना शरीर शव है और शरीर के बिना आत्मा भूत! लेकिन क्या उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से अलग किया जा सकता है या पेड़ों से जंगल को? इसी तरह शरीर व आत्मा भिन्न हैं, पर अलग नहीं।और भीऔर भी

कोटरों में दाने बीनती दुनिया। व्यक्ति की निजी दुनिया। व्यक्तियों से समाज, समाजों से देश और देशों से बनी दुनिया। हर किसी को मुकम्मल जहां मिल जाता तो इस तरह नहीं बनती दुनिया।और भीऔर भी

बाजार ठीक वहीं चोट करता है जहां आप सबसे कमजोर होते हैं। लेकिन कैसा सांस्कृतिक निर्वात है कि शीला की जवानी और मुन्नी बदनाम जैसे गाने हमारे सामाजिक समारोहों का एन्थम बन जाते हैं?और भीऔर भी