सूरत नहीं, सीरत

दूर से ढोल के बोल ही नहीं, लोग भी बड़े सुहाने लगते हैं। पास आने पर पता चलता है कि सुहानी सूरत के पीछे कितना विद्रूप छिपा है। इसीलिए कहते हैं कि इंसान की सूरत नहीं, सीरत पर जाना चाहिए।

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