बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में शिवालिक बाईमेटल कंटोल्स का शेयर सोमवार को सुबह करीब 7 फीसदी की बढ़त के साथ 32 रुपए तक पहुंच गया। फिर 10 फीसदी बढ़त के साथ 33 पर पहुंचा तो इस पर ऊपरी सर्किट ब्रेकर लग गया। पिछले हफ्ते इस पर सर्किट ब्रेकर 20 फीसदी का था। लेकिन आज घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया। इसके बाद शेयर गिरकर 29.95 पर बंद हुआ। इसके बावजूद बाजार में चर्चा है कि यह कुछऔरऔर भी

यह किसी आम आदमी का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह के बिजनेस अखबार मिंट के डिप्टी एडिटर स्तर के खास आदमी का मामला है। उनका नाम क्या है, इसे जानने का कोई फायदा नहीं। लेकिन उनके साथ घटा वाकया जानने से बीमा उद्योग का ऐसा व्यावहारिक सच हमारे सामने आता है जो साबित करता है कि इस उद्योग में निहित स्वार्थों का ऐसा नेक्सस बना हुआ है जिसका मकसद बीमा उद्योग या कंपनी का विकास नहीं, बल्किऔरऔर भी

पिछले दो सालों से दुनिया भर की सरकारों और केंद्रीय बैंकों के लिए मुसीबत बना संकट अब लगभग मिट चुका है। अब हमें उन चुनौतियों पर ध्यान देने की जरूरत है जिनसे हमें आगे के सालों में जूझना है। तय-सी बात है कि औद्योगिक देश अब धीमे विकास के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। दूसरी तरफ भारत लगातार मजबूत हो रहा है और भविष्य में अच्छी प्रगति की संभावना है। हमारी घरेलू बचत दर बढ़कर जीडीपीऔरऔर भी

एस पी सिंह दूसरी हरितक्रांति और दलहन विकास के लिए सिर्फ 700 करोड़ रुपये का सरकार ने बजट में प्रावधान किया है। जबकि आईपीएल की एक टीम 1702 करोड़ रुपये में बिकी है। यह हाल चल रहा है गरीबों व भुखमरी के शिकार लोगों के देश में!! खाद्यान्न की महंगाई ने लोगों की रसोई का बजट खराब कर दिया है और गरीबों के पेट भरने के लाले पड़े हैं। महंगाई पर चर्चा कराने को लेकर पक्ष-विपक्ष कीऔरऔर भी

हरियाणा के उपभोक्ता, सरकार और उद्योग महंगी बिजली के जबरदस्त कुचक्र में फंस गये हैं। बिजली कंपनियों का घाटा पिछले चार गुना बढ़ाकर पिछले 1400 करोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार अपना खजाना फूंक कर बाजार से दोगुनी अधिक कीमत में बिजली खरीद रही है। इसी को कहते हैं घर फूंक कर रोशन करना। कर्ज लेकर घी पीना। राज्य की बिजली कंपनियां बिजली की जगह घाटा बना रही हैं। बिजली क्षेत्र की यह बदहाली आने वालेऔरऔर भी

देश में अंग्रेजों के जमाने के रिवाजों व कानूनों को बदलने का मन बनने लगा है। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को भोपाल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह में पहनी जानेवाली ड्रेस को बर्बर औपनिवेश रिवाज बताते हुए उतार फेंका तो उसके एक दिन पहले गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक के प्लैटिनम जुबली समारोह में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश में वित्तीय क्षेत्र को चलानेवाले ज्यादातर कानून पुराने पड़औरऔर भी

मोटे तौर पर कहा जाए तो बाजार में शेयर के भाव किसी भी दूसरे सामान की तरह डिमांड और सप्लाई या मांग और उपलब्धता से तय होते है। अगर निवेशक मानते हैं कि इस कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है या वह आगे भी काफी अच्छा काम करेगी तो वे उस शेयर को खरीदने में जुट जाते हैं। अब चूंकि एक खास समय पर कंपनी द्वारा जारी किए शेयरों की संख्या और ट्रेडिंग के उपलब्ध शेयरों कीऔरऔर भी

किशोर ओस्तवाल जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी-जल्दी करने की इच्छा होती है। सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं। उस समय ये प्यारी-सी कथा हमें याद आती है। दर्शन-शास्त्र के एक प्रोफ़ेसर क्लास में आए और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं। उन्होंने अपने साथ लाई एकऔरऔर भी

“शरीर हमसे बिना पूछे सोते-जागते, दिन-रात अपना काम करता रहता है। हमारे पूरे सुरक्षा तंत्र को चाक-चौबंद रखता है। लेकिन उसे भी कभी-कभी हमारी मदद की जरूरत पड़ती है। वह इशारों में बताता है। जब भी हम इन इशारों को नहीं समझते तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।”और भीऔर भी

मैं अपने घर के चारों तरफ ऊंची-ऊंची बाड़ नहीं लगाना चाहता। न ही मैं अपने खिड़की-दरवाजे बंद रखना चाहता हूं। मैं तो दुनिया भर की हवाओं, संस्कृतियों को अपने घर से बेरोकटोक बहने देना चाहता हूं। लेकिन मैं इन हवाओं को अपने पैर ज़मीन से उखाड़ने की इजाजत नहीं दे सकता: महात्मा गांधीऔर भीऔर भी