थोक के भाव खरीदो, रिटेल के भाव बेचो
अपने यहां जो जितना कमाता है, उस पर और ज्यादा कमाने की हवस चढ़ी है। दुनिया भर में मॉल कम से कम डेढ़ दिन बंद रहते हैं, जबकि अपने यहां सातों दिन खुले रहते हैं। कल साल के पहले दिन अमेरिका, यूरोप व ऑस्ट्रेलिया से लेकर सिंगापुर, हांगकांग, चीन, जापान व कोरिया जैसे एशिया के तमाम शेयर बाज़ार बंद रहे। लेकिन अपने यहां एनएसई व बीएसई खुले रहे क्योंकि जितने भी निवेशक या ट्रेडर आ जाएं, कुछऔरऔर भी
ट्रेडिंग सीखना है तो चार मूलभूत किताबें
यह हमारे ही दौर में होना था। एक तरफ शेयर बाज़ार में अल्गो ट्रेडिंग के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या एआई की धमक। दूसरी तरफ ट्रेडिंग व निवेश सिखानेवाला कोई शख्स कह रहा है, “कर्ता कृष्ण और दाता राम हैं। हम तो निमित्र मात्र हैं।” यह कैसा विरोधाभास है? लेकिन यह विचित्र, किंतु सत्य है। ऊपर से भोले-भाले व लालच में फंसे लोगों के लिए डिफाइन येज और नॉयज़लेस चार्ट के प्वॉइंट्स एंड फिगर्स जैसे धांसू जुमले। इनकेऔरऔर भी
धर्म-राजनीति का फ्रॉड घुसा अर्थनीति में!
आज के दौर में शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग से कमाने की सोचनेवालों को बेहद सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि झूठ, छद्म व फ्रॉड का दौर चल रहा है, जिसका सच अमृतकाल का नाम देकर छिपाने का अभियान चलाया जा रहा है। जब गुजरात का किरन पटेल कश्मीर जैसे संदेशनशील राज्य में महीनों तक सरकार को चरका पढ़ाता रहा, पीएमओ से ही गहरे ताल्लुकात रखने का दावा करनेवाले संजय शेरपुरिया को करोड़ों की ठगी करनेऔरऔर भी
मुफ्त सलाह बांट रहे ‘संतन’ से सावधान
आजकल सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक और यू-ट्यूब पर शेयर बाज़ार से कमाने के गुर सिखानेवाले संतन की भीड़ लगी हुई है। चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़, तुलसीदास चंदन घिसैं तिलक देत रघुवीर – जैसा माहौल है। गजब श्रद्धा और विश्वास नज़र आता है। ऐसे संतगण तमाम चार्ट और फॉर्मूले चस्पा कर बताते रहते हैं कि उनके पास ऐसी विद्या है जिससे शेयरों में ट्रेडिंग से लेकर निवेश तक से जमकर कमाई की जा सकतीऔरऔर भी
अनुभव से निखारते रहें निवेश की कला!
जब हर तरफ सोशल मीडिया पर निवेश के गुर सिखानेवाले घंटालों की बाढ़ आई हो, तब हमेशा एक बात याद रखनी चाहिए कि अपना अनुभव ही हमारा सबसे बड़ा शिक्षक या गुरु होता है। यही प्रज्ञा या प्रत्यक्ष ज्ञान है। हर साल हमें कुछ न कुछ प्रज्ञा देकर जाता है। वित्तीय बाज़ार पर आई हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में म्यूचुअल फंडों की एसआईपी स्कीम निवेशकों की पहली पसंद रही है। इस दौरान 62%औरऔर भी





