दुत्कारा गया जानवर, भिखारी या गरीब किसी कोने में दुबक कर रह जाता है। वो किसी का कुछ नहीं बिगाड़ पाता। लेकिन सत्ता के गलियारों से तिरष्कृत विष्णु गुप्त एक दिन चाणक्य बन पूरे नंद वंश का ही नाश कर नई सत्ता बना डालता है।और भीऔर भी

संविधान कोई कविता, कहानी या उपन्यास नहीं है जिसे कोई एक व्यक्ति अपने दम पर लिख सके। लेकिन अपने यहां दलितों की मासूम भावनाओं को फायदा उठाने के लिए ऐसा राजनीतिक पाखंड खड़ा किया गया है कि हर किसी की बोलती बंद है।और भीऔर भी

इंसान और विपक्ष का असली चरित्र तभी खुलता है जब उसे सत्ता मिलती है। तभी पता चलता है कि वो कितना संत था और कितना ढोंगी, उसकी बातों में कितनी लफ्फाजी थी और कितनी सच्चाई। संत तो सत्ता पाकर भी सृजनरत रहता है।और भीऔर भी

कानून ही लंबे समय में व्यापक सामाजिक स्वीकृति पाने के बाद नैतिकता बन जाते हैं। फिर भी नैतिकता सर्वकालिक नहीं होती। किसी नैतिक मानदंड के सही होने का एक ही पैमाना है कि वह व्यापक समाज के वर्तमान व भावी हित में है या नहीं।और भीऔर भी

स्वार्थ पर टिकी इस दुनिया में भी लोग परमार्थी हो सकते हैं। लेकिन कोई हमारा इतना हितैषी क्यों बन रहा है? दूसरे की सलाह पर गौर करते हुए हमें खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए। अपने स्वार्थ की साफ समझ इसी तरह से बनती है।और भीऔर भी

केंद्र सरकार ने देश में गरीबी के आकलन और गरीबों की पहचान के नए तौर-तरीके सुझाने के लिए एक अलग विशेषज्ञ दल बनाने का फैसला लिया है। यह दल प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के प्रमुख डॉ. सी रंगराजन की अध्‍यक्षता में बनाया जाएगा। इसमें कई जानेमाने अर्थशास्त्री शामिल है। इनमें प्रमुख हैं: इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्‍थान के निदेशक डॉ. महेन्‍द्र देव, दिल्‍ली स्‍कूल ऑफ इकॉनोमिक्‍स के पूर्व प्राध्‍यापक डॉ. के सुन्‍दरम, सीएमआईई के प्रमुख डॉ.औरऔर भी

दिल्‍ली डाक सर्किल ने गुरू पुष्‍य नक्षत्र के मौके पर सोने के सिक्‍कों की खरीद पर विशेष छूट देने की घोषणा की है। गुरू पुष्‍य नक्षत्र शनिवार, 26 मई 2012 को पड़ रहा है। सोने के सिक्‍के राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के 31 डाकघरों में उपलब्‍ध हैं। ग्राहक निकटतम डाकघरों में पहुंच कर इनकी खरीद पर 6.5 फीसदी की छूट पा सकते हैं। यह पेशकश 26 मई 2012 तक मान्‍य है। दिल्‍ली में चिन्हित कुछ डाकघरों मेंऔरऔर भी

किसी इंसान के बुद्धिमान या धनवान होने का मतलब यह नहीं कि उसने अपनी पशु-वृत्तियों पर काबू पा लिया है; बल्कि सत्तावान होते ही उसकी पशु-वृत्तियां और प्रबल हो जाया करती हैं। केवल ज्ञानवान ही पशु-वृत्तियों का शमन कर पाते हैं।और भीऔर भी

जिस सरकार को आमतौर पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आम आदमी के मानवाधिकारों की खास फिक्र नहीं रहती, उसे विदेश में काला धन रखनेवाले खास भारतीयों के मानवाधिकारों के उल्लंघन की भारी चिंता सता रही है। सोमवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से कालेधन पर संसद में पेश श्वेतपत्र में कहा गया है कि सरकार ने दुनिया के जिन देशों के साथ दोहरा कराधान बचाव करार (डीटीएए) या कर सूचना विनिमय करार (टीआईईए) कर रखे हैं,औरऔर भी

काश! हम उतना ही पैदा करते, जितना वाकई आवश्यक है। लेकिन मुनाफा बढ़ाते जाने के इस दौर में अनावश्यक चीजें बनाई और ग्राहकों के गले उतारी जा रही हैं। इससे वो प्राकृतिक संपदा छीझती जा रही है जो फिर कभी वापस नहीं आएगी।और भीऔर भी