जादू है, नशा है, पर मदहोशी न चढ़े
आज शनिवार को एनएसई और बीएसई में विशेष ट्रेडिंग सत्र होगा। 11 बजे से 12.45 बजे तक जिसमें शुरू में 15 मिनट का प्री-ओपन सत्र होगा। कैश और फ्यूचर व ऑप्शन (एफ एंड ओ) दोनों में ऑर्डर पेश किए जा सकते हैं। यह सूचना उन लोगों का दिल खुश कर देनेवाली है जिन्हें ट्रेडिंग का नशा लग चुका है। मैं इधर कुछ लोगों से मिला जो सुबह नौ बजे से लेकर शाम साढ़े तीन बजे बाज़ार बंदऔरऔर भी
घड़ी-घड़ी नहीं, चाहिए बड़ा टाइमफ्रेम
चींटियों से चलने से घास भी नहीं हिलती, जबकि हाथी सूखी ज़मीन तक पर छाप छोड़ जाते हैं। लेकिन, चींटी खट से मुड़ जाती है, जबकि हाथी को वक्त लगता है। जो लोग घड़ी-घड़ी शेयरों की चाल देखकर रुख समझने का शगल पालते हैं, वे अक्सर गच्चा खाते हैं। शेयर बाज़ार में ‘हाथियों’ के ऑर्डर पांच-सात दिन लगाते ही हैं। इसलिए उनके रुख को पकड़ने का टाइमफ्रेम बड़ा होना चाहिए। वैसे, कल ढाई बजे क्या हमला हुआ!…औरऔर भी
फर्क सूत भर का, पर पलटे है बाज़ी
लोकतंत्र और बाज़ार में सारा खेल नंबरों का है। बड़ी-बड़ी बातें और भावुक फेंकमबाज़ी फालतू है। कांग्रेस भ्रष्ट। बीजेपी भी खिलाड़ी। दोनों को कर्णाटक में लोगों से वोट दिए। लेकिन 37% पाकर कांग्रेस जीत गई, जबकि बीजेपी व उससे छिटके दोनों दल कुल सूत भर कम वोट पाकर हार गए। बाज़ार में भी सूत भर का अंतर चलता है। डिमांड ज्यादा कि सप्लाई? हां, यहां भाव और मूल्य का अंतर भी अहम है। अभी आज का बाज़ार…औरऔर भी
नोटों की आंधी है, शेयर हैं दौड़े पड़े
शेयर बाज़ार में लालच के भाव से उतरना गलत ही नहीं, घातक है। निवेश का मकसद अपनी बचत को समय की मार से बचाना है। जो समय पर सवारी कर रहे हैं, बचत को उन्हीं की पीठ पर रखकर हम निश्चिंत हो जाते हैं। वहीं, ट्रेडिंग शुद्ध रूप से नए ज़माने का बिजनेस है। इसमें बहुत कुछ नया है। तकनीक है, तरीके हैं। इन्हें सीखना-समझना है। वरना है तो मूलतः व्यापार। अभी की हालत बड़ी चित्र-विचित्र है…औरऔर भी
ज्ञान गहरा, यहां न चले छिछलापन
निवेश और ट्रेडिंग में कामयाबी के तरीके अलग-अलग हैं। लेकिन भाव समान है। निवेश के बारे में कहते हैं कि जब लोग उछल-कूद रहे हों, तब आप शांत रहते हुए उल्टा सोचें। ट्रेडिंग के बारे में मानते हैं कि दिग्गज जिधर भाग रहे हों, उसी दिशा को शांत मन से सबसे पहले पकड़ लें। दोनों में शांत मन समान है। यह बनता है गहनतम समझदारी और ज्ञान से, छिछलेपन से नहीं। उतरते हैं आज के बाज़ार में…औरऔर भी





