केंद्र सरकार के वजूद पर सच में कहें तो कोई तलवार नहीं लटकी है। फिर भी बाज़ार है कि गिरता ही जा रहा है। बड़े-बड़े निवेशक राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर घबरा गए हैं। ऊपर से कॉरपोरेट क्षेत्र भी निराशा जता रहा है। बहुत ही कम मौके ऐसे होते हैं जब एफआईआई (विदेशी निवेशक संस्थाएं) और डीआईआई (घरेलू निवेशक सस्थाएं) एक जैसा बर्ताव करें। लेकिन कल ऐसा ही हुआ। एफआईआई और डीआईआई दोनों ही बिक्री पर उतारू रहे।औरऔर भी

बाज़ार जो चाहता था, रिजर्व बैंक ने उसे दे दिया। ब्याज दर चौथाई फीसदी घटा दी। कच्चे तेल के दाम भी नीचे हैं। फिर भी वह डेढ़ फीसदी का गोता लगा गया। कारण, मनचाहे आर्थिक फैसले पर अनचाही राजनीति हावी हो गई। केंद्र सरकार से डीएमके की समर्थन वापसी की बात बाज़ार को जमी नहीं।  खैर, इससे शायद सरकार के टिके रहने पर कोई फर्क न पड़े क्योंकि समाजवादी पार्टी और बीएसपी का बाहरी समर्थन उसे बचाऔरऔर भी

आज सुबह 11 बजे रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते वक्त ब्याज दरें घटा सकता है। ज्यादातर लोगों का यही मानना है। हालांकि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी रिजर्व बैंक से यही अपील की है। लेकिन यह महज एक आशावाद है। रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव वही करते हैं जो उनकी समझ और विवेक कहता है। वे तो मौद्रिक नीति पर सलाह देने के लिए बनी समिति के बहुमत को भी ठुकरा कर फैसला करतेऔरऔर भी

बाज़ार में एक तरह का आशावाद छा गया है। थोक महंगाई की दर पहले से थोड़ा बढ़ गई। लेकिन इसमें मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की महंगाई पहले से घट गई। और, रिजर्व बैंक इसे ही ब्याज दर में कटौती का आधार बनाता है। ऊपर से रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम की तारीफ करते हुए कहा है कि वे विकास को बढ़ावा देने के पक्ष में हैं। इससे लग रहा है कि अगले हफ्ते मंगलवार,औरऔर भी