लगे टिप्स की रेस ट्रेडिंग सिस्टम पर
कुछ चीजें लगभग नहीं, एकदम-एकदम अंसभव होती हैं। लेकिन हमेशा जीतने की इच्छा और जिजीविषा इंसान को अक्सर यह मानने पर मजबूर कर देती है कि जो वो चाहता है, वही होगा। नहीं होता तो हम किस्मत से लेकर अपने आसपास के लोगों पर दोष मढ़ने लगते हैं। मैं भी इस बार यही कर रहा हूं। इधऱ-उधर की भागमभाग और उन चार गुरुओ को दोष दे रहा हूं जिनसे मैं हाल-फिलहाल ट्रेडिंग के हुनर सीख रहा हूं।औरऔर भी
बुलबुला फूटे जब भी, झलक अभी से
परसों कहा गया कि एलएंडटी का 6.45% गिरना अपने साथ शेयर बाज़ार को डुबा ले गया। कल यह तोहमत उसके साथ ही साथ एसबीआई पर भी लग गई क्योंकि एलएंडटी के शेयर 6.49% और गिरे, वहीं एसबीआई को 7.96% का सदमा लगा। निफ्टी में एलएंडटी का भार 4.05% और एसबीआई का भार 2.93% है। पर असल में यह झलक है कि सस्ते धन का प्रवाह रुकने से बुलबुला कैसे पिचक सकता है। बाज़ार अब घबराने लगा है।…औरऔर भी
भीड़ की भेड़चाल या इंसानों की चाल!
न्यूनतम रिस्क, अधिकतम रिटर्न। हर कोई यही चाहता है। यह चाह पूरी की जा सकती है, बशर्ते हम भरपूर नाप-जोख कर लें। बाज़ार में भगवान तो ट्रेडिंग करता नहीं। जो भी करते हैं इंसान ही करते हैं। अल्गो ट्रेडिंग की डोर इंसान ही संभालता है। कुछ इंसान बाज़ार का रुख तय करते हैं, जबकि ज्यादातर इंसान इस रुख में बहते हैं। हमें इन्हीं कुछ इंसानों की चाल को पकड़ने का हुनर सीखना है। रुख करें बाज़ार का…औरऔर भी
मुश्किल तो है, मगर नामुमिकन नहीं
चीज़ कितनी भी अच्छी या काम की हो, बाज़ार में उसे भाव तभी मिलता है जब लोगों की निगाह में वो चढ़ जाती है। शेयरों के साथ भी यही होता है। लेकिन लोकतंत्र में जिस तरह मतदान गुप्त रखा जाता है, उसी तरह यहां कौन-कौन खरीद-बेच रहा है, यह जाहिर नहीं होता। संस्थागत निवेशकों का रुख पता चल जाए तो ट्रेडरों की किस्मत खुल जाती है। यह मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। पकड़ते हैं आज की दशा-दिशा…औरऔर भी
शेयर तो हैं नहीं, फिर चहके हो काहे!
शेयर बाज़ार में तेज़ी का फायदा दो लोगों को मिलता है। एक, जिनके पास कंपनियों के शेयर पहले से हैं और दो, जो बदलते रुख से ताल मिलाकर फटाफट ट्रेडिंग करते हैं। कमाल की बात है कि एयरलाइन का टिकट महंगा हो जाए तो हवाई सफर करनेवाला दुखी हो जाता है, लेकिन यहां तेज़ी के दौर में शेयरों के महंगा होने पर उसे न रखनेवाला चहककर बाज़ार की तरफ दौड़ पड़ता है। सोचिए-समझिए। अब मौके की बात…औरऔर भी





