लगे टिप्स की रेस ट्रेडिंग सिस्टम पर

कुछ चीजें लगभग नहीं, एकदम-एकदम अंसभव होती हैं। लेकिन हमेशा जीतने की इच्छा और जिजीविषा इंसान को अक्सर यह मानने पर मजबूर कर देती है कि जो वो चाहता है, वही होगा। नहीं होता तो हम किस्मत से लेकर अपने आसपास के लोगों पर दोष मढ़ने लगते हैं। मैं भी इस बार यही कर रहा हूं। इधऱ-उधर की भागमभाग और उन चार गुरुओ को दोष दे रहा हूं जिनसे मैं हाल-फिलहाल ट्रेडिंग के हुनर सीख रहा हूं। यह सच है कि यह हफ्ता बाज़ार के लिए अच्छा नहीं रहा। बीएसई सेंसेक्स उस शुक्रवार से इस शुक्रवार तक 2.87% और एनएसई निफ्टी 3.29% टूट गया। हालांकि बढ़ने को ही अच्छा मानें तभी यह अच्छा नहीं रहा, अन्यथा दूसरे नज़रिए से देखें तो निवेश करना अब पहले से सस्ता हो गया है। पहले सेंसेक्स 17.53 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। अब घटकर 17.06 के पी/ई पर ट्रेड हो रहा है।

लेकिन बाज़ार के गिरने या सस्ता होने से ज्यादा बड़ा दुख हमारा है क्योंकि इस हफ्ते बताई गई 17 सिफारिशों में से चार ही निशाने पर लगी हैं, बाकी एकदम वाइड चली गईं। सोच में पड़ गया हूं कि इतने दिग्गज गुरुओं की गणना कैसे फेल हो गई? फिर यह बात समझ में आई कि गणना तो आखिर गणना ही है। एक भी तथ्य छूट जाए तो सारी गणना, सारे समीकरण फेल हो जाते हैं, सारे तर्क गलत नतीजों पर पहुंचा देते हैं। फिर, गणित में तो सारे कारकों को हम पकड़ सकते हैं क्योंकि वो हमारा बनाया हुआ है। लेकिन दुनिया में कोई न कोई कारक, कोई न कोई तथ्य आंख से ओझल रह ही जाता है। वो अगर महत्वहीन हुआ तो कोई बात नहीं। अहम हुआ तो शुक्र के लिए छोड़ा गया उपग्रह सीधे समुद्र में जाकर गिर जाता है।

इस दुनिया में भविष्य को लेकर एक ही चीज़ निश्चित है, वो है अनिश्चितता। इस हकीकत को हमें स्वीकार कर लेना चाहिए। इसे खत्म करने की अभिलाषा महज छलावा है, सदिच्छा है। इस वक्त शेयर बाज़ार के महारथी और दुनिया के मशहूर लेखक व प्रोफेशनल ट्रेडर डॉ. अलेक्जैंडर एल्डर की चार किताबें पढ़ रहा है। इसमें से एक का नाम है – कम इनटू माय ट्रेडिंग रूम। उनका कहना है कि ट्रेडर अपने गुरुओं के बारे में तीन चरणों में अलग-अलग नज़रिया रखते हैं। पहले चरण में वे उन्हें भगवान मानते हैं। उन्हें लगता है कि गुरु का हाथ पड़ने से वो पहले हज़ारों, फिर लाखों-करोड़ों में खेलेंगे।

दूसरे चरण में ट्रेडर गुरुओं को प्लेग की बीमारी जैसा मानकर उनसे दूर भागने की कोशिश करते हैं क्योंकि उनको लगता है कि वह शख्स उनके अपने फैसलों में बाधक बनता है। तीसरे चरण में कुछ कामयाब ट्रेडर ऐसे गुरुओं को तवज्जो देने लगते हैं जो उन्हें अच्छे मौकों के बार अलर्ट करते रहते हैं। वैसे, अपने यहां की ब्रोकरेज फर्मों का अलर्ट तो देखकर दिल ही डूब जाता है, जब उनकी एक के बाद एक कॉल्स में स्टॉप लॉस ट्रिगर होता रहता है। यहीं नहीं, हाल में मैंने जानीमानी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की सेवा वैंटेजट्रेड को महीने भर के लिए सब्सक्राइब करके देखा। उसका हाल तो और बुरा है।

टिप्स के बारे में भी ट्रेडरों का नज़रिया बदलता रहता है। शुरुआत में टिप्स को लेकर हाय-हाय मची रहती है। धीरे-धीरे परिपक्व होने पर वे अपना होमवर्क करने लगते हैं। वहीं जो ज्यादा सुलझे और समझदार होते हैं, वो सिफारिशों को लेते जरूर हैं। लेकिन उन्हें अपने ट्रेडिंग सिस्टम में डालकर देखते हैं कि वे कहां तक निशाने पर लग सकती हैं। होना भी यही चाहिए। डॉ. एल्डर कहते हैं, “जब भी मुझे कोई ट्रेडिंग टिप्स मिलती है, मैं उसे अपने कंप्यूटराइज्ड स्ट्रीन पर रन करता हूं। खरीदने, शॉर्ट करने या होल्ड करने का निर्णय सिर्फ और सिर्फ मेरा होता है। मेरा अनुभव है कि औसतन हर 20 टिप्स में से एक ही फायदा कराती है।”

असल में टिप्स उन मौकों की सूचना दे देती है जो किसी भी ट्रेडर की नज़र से छूटी हुई होती हैं। लेकिन अपने ट्रेड में सफल बनने का कोई शॉर्टकट नहीं है। मित्रों! हम भी अपने स्तर पर खोजकर और कुछ गुरुओं की मदद से ऐसे स्टॉक्स में ट्रेडिंग के मौके आपके सामने पेश करते हैं जो हो सकता है कि आपकी नज़र से छूट गए हों। डॉ. एल्डर कहते हैं कि वे आजतक ऐसे एक भी ट्रेडर से नहीं मिले जो अपने गुरु की सारी सिफारिशों पर अमल करता हो, जबकि इस सेवा के लिए वह भारी-भरकम फीस अदा करता है। अगर किसी गुरु के 200 सब्सक्राइबर हैं तो वे दी गई टिप्स या सिफारिशों में से अलग-अलग स्टॉक्स को चुनते हैं।

अंत में एल्डर की सलाह है, “आप अपने गुरु की सुनें या चाहे न सुनें, अपने ट्रेड के नतीजों के लिए आप खुद 100% ज़िम्मेदार हैं। अगली बार आपको कोई हॉट टिप मिलती है तो उसे अपने ट्रेडिंग सिस्टम में डालकर देखें कि वो खरीदने का सिग्नल देती है या बेचने का। आप मिली हुई सलाह को मानने या ठुकराने के निकले नतीज़ों के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार हैं।”

यह एक तरह का डिस्क्लेमर लगता है। लेकिन जीवन और शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग का सच यही है। अंत में इस लेख का शुरुआती वाक्य दोहराना चाहता हूं कि कुछ चीजें लगभग नहीं, पूरी अंसभव होती हैं। यह समझने के बाद अब मैंने अपने चार गुरुओं का दोष निकालने के बजाय अपने स्तर पर परख बढ़ाने का फैसला कर लिया है। आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।

2 Comments

  1. universl truth

  2. sahi baat kahi ..aapne. iss paid sewa me chamtkar chakri ko bhi jode…

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