फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार इस समय ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार या जीडीपी 3.73 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं, हमारे राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) के ताज़ा अनुमान और नए बजट के मुताबिक मार्च 2025 में समाप्त हो रहे वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार या जीडीपी ₹324.11 लाख करोड़ का रहेगा। इसे 86.69 रुपए प्रति डॉलर की विनिमय दर पर निकालें तो यह 3.74 ट्रिलियन डॉलर बनता है। दूसरे शब्दों में अब भी भारत दुनिया कीऔरऔर भी

हमें जीडीपी के विकास दर के झांसे को कायदे से समझना होगा। एक तो यह है कि साल के शुरू में विकास दर का बजट अनुमान होता है, जो तीन तिमाही बाद संशोधित अनुमान तक और फिर साल बीतने पर वास्तविक दर तक पहुंच जाता है। दूसरा यह है कि हमेशा विकास की एक नॉमिनल दर या सतही दर होती है जिसे मौजूदा मूल्यों पर निकाला जाता है। नॉमिनल विकास दर को जब मुद्रास्फीति के असर कोऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लम्बी-लम्बी फेंकने में माहिर व जगजाहिर हैं तो उनकी सरकार आर्थिक विकास तक में हांकने की उस्ताद बनी हुई है। जब से मोदी सरकार ने देश की सत्ता संभाली है, तब से पेश किए गए 11 बजट में से तीन (2020-21, 2021-22 और 2022-23) को कोरोना महामारी से प्रभावित और एक (2016-17) को अपवाद मानकर छोड़ दें तो बाकी सात में उसने जीडीपी की नॉमिनल विकास दर का जो अनुमान लगाया था, वास्तविक याऔरऔर भी

शेयर बाजार में निवेश की सलाह देनेवाले बहुत-से जमूरे सक्रिय हैं। चढ़े हुए बाज़ार में भी कहते हैं कि उनके पास इतनी सलाहें हैं कि आप खरीदते-खरीदते थक जाओगे, तब भी कम नहीं पड़ेंगी। आगे पूछो तो ब्रोकरों की तरह उन्हीं कंपनियों के शेयर खरीदने को कहते हैं जो पहले से चढ़े हुए हैं। लालच में पड़कर अगर आप इनके झांसे में आ गए तो सालों तक पछताते रह जाएंगे। ये तो दलाली खाकर दूर निकल जाएंगेऔरऔर भी