बाज़ार का गिरना बुरा नहीं, अच्छा है
हमारे मनाने से कुछ नहीं होता। फिर भी भारत जैसी अर्थव्यवस्था में, जहां बढ़ने की अपार संभावनाएं हों, वहां मनाना चाहिए कि एफआईआई के भागने जैसा कोई छोटा संकट आ जाए ताकि अच्छी कंपनियों के शेयर 20-30% नीचे आ जाएं और हम उन्हें सस्ते में खरीद सकें। खैर, वैसा न भी हो, तब भी हमारे यहां निवेश के बहुतेरे मौके हैं। इन्हीं में खोजकर लाते हैं हम अच्छी कंपनियां। तथास्तु में आज एक ऐसी ही स्मॉलकैप कंपनी…औरऔर भी
होलटाइम भारी तो पार्ट-टाइम भला
कोई होलटाइम ट्रेडिंग करे और महीने में 40,000 रुपए (साल के 5 लाख) भी न कमाए तो क्या फायदा! 25% सालाना रिटर्न पकडें तो इसके लिए 20 लाख की पूंजी चाहिए। इसके ऊपर दो साल का बफर, 10 लाख रखना होगा। इसके अलावा इतनी ही रकम बचत खाते में अलग होनी चाहिए। इस तरह ट्रेडिंग से महीने में 40,000 कमाने के लिए कुल चाहिए 40 लाख रुपए। इतने नहीं तो पार्ट-टाइम ही अच्छा। अब शुक्रवार की गति…औरऔर भी
लीक छोड़ चलते हैं हमेशा कुशल ट्रेडर
पारंपरिक विवेक कहता है कि अच्छी खबर पर शेयर खरीदो और बुरी खबर पर बेचो। लेकिन कुशल ट्रेडर इसका उल्टा करते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि खबरों का असर स्थाई नहीं होता। अच्छी खबर पर सभी खरीदने पर उतारू होते हैं जिससे शेयर चढ़ते हैं। कुशल ट्रेडर इस मौके पर मुनाफावसूली करते हैं। वहीं बुरी खबर पर शेयर गिरते हैं तो ट्रेडर इस अवसर का इस्तेमाल पोजिशन बनाने में करते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
सुस्त जो चाल, मोड़ से वो होती तेज़
ट्रेडिंग का एक स्टाइल: बहती गंगा में हाथ धोना, यानी हफ्ते-दस दिन के अल्कालिक चक्र में भाव जिस दिशा में चला हो, उसी दिशा में सौदे पकड़कर कमाई करना। लेकिन बीच में घुसने के नाते इसमें कमाई की रेंज कम होती है। दूसरे, रुख पलटा तो चपत का रिस्क तगड़ा रहता है। दूसरा स्टाइल: निश्चित अंतराल पर भाव जहां से रुख पलटते हैं, उस बिंदु को पकड़ना। इसमें रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात ज्यादा रहता है। अब बुधवार का व्यवहार…औरऔर भी






