हम बैंकों की एफडी, डाकघर बचत, पीपीएफ या लघु बचत योजनाओं में जो भी धन जमा करते हैं, उससे सरकार को सस्ता कर्ज मिल जाता है जिससे वह आमदनी से ज्यादा की गई फिजूलखर्ची या अपने राजकोषीय घाटे को पाटती है। इसी क्रम में उसने किसान विकास पत्र (केवीपी) को फिर से ज़िदा किया है। लेकिन खुद वित्त मंत्री जेटली ने बताया है कि यह करेंसी नोटों जैसा एक बियरर प्रपत्र है जिस पर किसी का नामऔरऔर भी

शेयर या अन्य वित्तीय प्रपत्रों की ट्रेडिंग को हमने भौकाल समझ रखा है, जबकि यह मूलतः किसी दूसरे व्यापार जैसा है। कोई इलेक्ट्रॉनिक सामानों का व्यापार करता है, कोई जनरल स्टोर चलाता है तो कोई सब्जी-भाजी की दुकान करता है। सभी थोक के भाव खरीदकर रिटेल के भाव बेचते हैं। अंतर बस इतना है कि शेयर बाज़ार में थोक बाज़ार अलग से नहीं लगता। हमें थोक भाव खुद पता करना होता है। अब समझें शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी

ऑफिस में आपको सुविधा रहती है कि चट जाने पर आप साथ के लोगों के साथ गप-शप कर सकते हैं, कैंटीन में जा सकते हैं। लेकिन ट्रेडिंग एक तरह की साधना है जिसे आपको अकेले ही पूरा करना पड़ता है। तलवार की धार पर चलने जैसा काम है। इसमें व्यवधान नहीं चाहिए क्योंकि ध्यान टूटा तो आप भावना या असावधानी में नुकसानदेह फैसला ले सकते हैं। इनपुट जगह-जगह से, लेकिन फैसला अपना। अब देखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मुंबई नगरिया में मनोज बाजपेयी जैसे हज़ारों कुशल अभिनेता हैं जिनको एक बार काम मिलता है तो महीनों तक सन्नाटा छा जाता है। वित्त के बाज़ार में मंजे हुए ट्रेडर भी ऐसी ऊंच-नीच से बच नहीं पाते। प्रायिकता का पांसा हमेशा आपके पक्ष में बैठे, यह ज़रूरी तो नहीं। इसलिए अभिनेता से लेकर पूर्णकालिक ट्रेडर तक को महीनों के रसद-पानी का इंतज़ाम करके रखना पड़ता है। इस रिस्क को समझ लें कायदे से। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग से जीविका चलाना आसान नहीं। इसमें तगड़ा अनुशासन चाहिए। सुबह 8 बजे तक तैयार होकर कंप्यूटर पर बैठ जाएं। देखें कि बीती रात हमारे बंद हुए विदेशी बाज़ारों का क्या हाल रहा और आज हमसे पहले खुले एशिया के बाज़ारों की क्या हाल है। फिर, अपने यहां तमाम सूचकांकों का कल क्या हाल रहा। डे-ट्रेडर हैं तो शाम तक बराबर डटे रहना होगा। स्विंग या पोजिशनल ट्रेडर हैं तो बात अलग है। अब मंगल की दशा-दिशा…औरऔर भी