न सूत न कपास, क्यों बना इतिहास!
कहीं से खास अच्छी खबर नहीं आई। वित्त मंत्रालय ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष 2014-15 में 5.6% रहेगी। वहीं, आईएमएफ ने 2015 व 2016 में विश्व की आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर क्रमशः 3.5% व 3.7% कर दिया। फिर भी सेंसेक्स 2.01% और निफ्टी 1.89% बढ़कर नए शिखर पर पहुंच गए। क्यों और कैसे? बाज़ार को समझने की कुंजी छिपी है इसके जवाब में। अब पकड़ें बुध की बुद्धि…औरऔर भी
सिद्धांत अलग, बाज़ार का सच अलग
किसी भी बाज़ार के सफल कामकाज़ के लिए भावों पर असर डालने वाली सारी घोषित सूचनाओं तक सभी ट्रेडरों की समान पहुंच का होना ज़रूरी है। पर व्यवहार में ऐसा होता नहीं। अपने यहां तो खुद प्रवर्तक, ऑपरेटरों के साथ मिलकर खेल करते हैं। अंदर की खबरों पर आधारित इस तरह की इनसाइडर ट्रेडिंग अवैध है। फिर भी सेबी की तमाम कोशिशों के बावजूद यह अपने यहां की कड़वी हकीकत है। करते हैं अब मंगल का अभ्यास…औरऔर भी
सावधान! सामने बैठा है घाघ खिलाड़ी
ट्रेडिंग में वही रिस्क उठाने चाहिए जिसमें अपने फायदे की गुंजाइश ज्यादा और नुकसान की न्यूनतम हो। अंधे रिस्क का कोई मतलब नहीं क्योंकि याद रखें कि सामनेवाला घाघ खिलाड़ी घात लगाए बैठा है। इसलिए बाज़ार में उतरें तो पूरी तैयारी और गणना के साथ कि फायदे की प्रायिकता और दांव उल्टा पड़ने की आशंका कितनी है। सतर्क रहें और दांव उल्टा पड़ते ही कम से कम नुकसान में बाहर निकल लें। अब देखें सोम का व्योम…औरऔर भी
स्मॉल-कैप है उछलता-गिरता तेज़ी से
बिन-मांगे बहुतेरी टिप्स का एसएमएस आता रहता है। लेकिन अच्छी कंपनियों की खबर लगते ही उस्ताद लोग उन्हें बताते किसी को नहीं, खुद खरीदते चले जाते हैं। आज हम तथास्तु में ऐसी ही एक संभावनामय कंपनी के बारे में बताने जा रहे है जिसका शेयर पिछले पांच दिन में 35% से ज्यादा बढ़ गया। जाहिरा तौर पर निवेश से पहले उसके ठंडा होने का इंतज़ार करना पड़ेगा। और, ऐसा होकर रहेगा क्योंकि स्मॉल-कैप की यही फितरत है।…औरऔर भी







