सेंसेक्स व निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर। सेंसेक्स 4.11% बढ़ कर 29,278.84 और निफ्टी 3.78% ऊपर 8835.60 पर बंद हुआ। पांचों दिन सूचकांक बढ़ते रहे। लेकिन इस दौरान हर दिन बाज़ार में बढ़ने वाले शेयरों का अनुपात घटता रहा। सोम को एनएसई में ट्रेड हुई कुल कंपनियों में से 58.28% के शेयर बढ़े थे, वहीं यह अनुपात शुक्र को 32.47% पर आ गया। साफ है कि बाज़ार की तेज़ी का आधार सिकुड़ता गया है। क्या है इसका मतलब…औरऔर भी

पब्लिक सेक्टर को गरियाना फैशन बन गया है। लेकिन महान सांख्यिकीविद व नेहरू के करीबी महलनोबिस ने 1956 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव में माना था कि 15 साल बाद, यानी 1971 से यह क्षेत्र सरकार को इतना लाभांश देगा कि आम लोगों पर कोई टैक्स लगाने की ज़रूरत नहीं होगी। राजनीतिक भ्रष्टाचार ने उनकी गणना को भले ही नाकाम कर दिया हो, पर अभी भी हैं इस क्षेत्र में तमाम रत्न। तथास्तु में ऐसा ही एक महारत्न…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में ज्यादातर लोग विफल होते हैं तो सोचते हैं कि कोई तो छिपी हुई तकनीक या टेक्निकल एनालिसिस का जटिल इंडीकेटर होगा जो उनसे छूटा जा रहा है। ऐसी मनःस्थिति में कुछ लोग जादुई चिराग लेकर उनके सामने आ जाते हैं और दावा करते हैं कि उनका तीर कभी खाली नहीं जाता। लेकिन वहां भी धोखा मिलता है। हमारा यकीन मानिए: किसी के पास कोई जादुई मंत्र नहीं है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग और शेयर बाज़ार पर ज्ञान तो बहुतेरा है। किताबों से लेकर इंटरनेट तक विपुल भंडार है। लेकिन फायदा वही कराता है जिसे हम सोच व व्यवहार में उतार सकें। जैसे, कहते हैं कि स्टॉप-लॉस को ट्रेडिंग के बिजनेस की लागत मानकर चलें। लेकिन गणना के गलत होते ही कोई शेयर डूबता है तो हमारा मन भी डूब जाता है। इसलिए 2% से ज्यादा स्टॉप-लॉस वाले सौदे को कभी हाथ नहीं लगाना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी