लगातार तीन ट्रेड गलत। हरेक में 2-2% का स्टॉप लॉस तो कुल 6% का नुकसान। नियम कहता है कि इतना नुकसान होते ही महीने भर के लिए ट्रेडिंग रोक देनी चाहिए। कुछ भी करें। पढ़ें-लिखें। मौजमस्ती करें। लेकिन ट्रेडिंग न करें। इसकी बड़ी मनोवैज्ञानिक वजह है। दरअसल, सचमुच का घाटा लगने पर हम अंदर से घबरा जाते हैं और घबराहट में गलत फैसले ले सकते हैं। ट्रेडिंग पूंजी को आंच न आने दें। अब गुरुवार का दशा-दिशा…औरऔर भी

पहाड़ से उतरिए तो शॉर्टकट से खटाखट 15 मिनट में नीचे पहुंच जाएंगे। लेकिन उसी या किसी अन्य रास्ते से चढ़िए तो घंटे-डेढ़ घंटे लगेंगे। शेयरों का भी यही हाल है। 100 से 98 तक आया तो गिरा 2%, लेकिन वापस 100 तक पहुंचने के लिए 2.04% बढ़ना होगा। 5% गिरा तो वापस पहुंचने के लिए 5.26% बढ़ना होगा। 50% गिरा तो खोया धन पाने के लिए 100% बढ़ना होगा। इसलिए घाटा संभालें। अब आगाज़ बुधवार का…औरऔर भी

अंग्रेज़ी में कहावत है कि एक ही टोकरी में सारे अंडे रखोगे तो टूट जाएंगे। इसीलिए निवेश में पोर्टफोलियो का नियम चलता है। न्यूनतम 40 कंपनियों का पोर्टफोलियो हो तो उनके अलग-अलग रिस्क आपस में कट जाते हैं, बचता है केवल बाज़ार का समग्र रिस्क। इसी तरह ट्रेडिंग में पोर्टफोलियो का नियम कहता है कि 100 रुपए हों तो 5-5 रुपए 20 स्टॉक्स में लगाओ। कुछ विशेषज्ञ 2-2 लगाने की सलाह देते हैं। अब मंगल का मंगलम…औरऔर भी

हड़बड़ी में गड़बड़ी हो ही जाती है। लेकिन कभी-कभी पूरी मशक्कत के बाद निकाला गया ट्रेड का आइडिया भी फेल हो जाता है। इसीलिए कहते हैं कि ट्रेडिंग में अच्छा आइडिया ज़रूरी तो है, पर पर्याप्त नहीं। वो तब पर्याप्त बनता है, जब रिस्क संभालने का बंदोबस्त चौकस रखा जाए। इसके लिए 2%-6% का बुनियादी नियम है। साथ ही किसी एक ट्रेड में हमें पोर्टफोलियो का 5% से ज्यादा भाग नहीं लगाना चाहिए। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बढ़ने का नाम ज़िंदगी। जो ठहरा, वो निपटा। कंपनियों पर भी यह बात बराबर लागू होती है। धंधा लगातार बढ़े तो उसके शेयर चढ़ते हैं। किसको पता था कि फरवरी 1993 में 95 पर जारी इनफोसिस के शेयर इक्कीस साल बाद 4150 तक जानेवाले हैं। वो भी पांच बार 1:1 और एक बार 3:1 में बोनस शेयर के बाद। इसलिए यहां महंगा सस्ता 52 हफ्ते के उच्चतम/न्यूनतम से नहीं तय होता। तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी