ट्रेडिंग और निवेश की दुनिया एकदम भिन्न है। एक में भावों का ट्रेन्ड पकड़ते हैं। ट्रेन्ड गलत निकले तो मार से बचने के लिए स्टॉप-लॉस लगाकर चलना ज़रूरी है। वहीं, निवेश शेयर के अंतर्निहित मूल्य के आधार पर किया जाता है। बाजार भाव उससे जितना कम होता है, निवेश उतना ही फलदायी होता। कंपनी के मूलभूत कारक मजबूत हैं और शेयर गिर गया तो उसे और ज्यादा खरीदा जा सकता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बड़ी उलटबांसियां चलती हैं बाज़ार में। जैसे अगर किसी शेयर में खरीदनेवाले बिड, बेचनेवाले ऑफर से कई गुना ज्यादा हों, खबर भी जबरदस्त हो तो सामान्यतः उसका भाव चढ़ जाना चाहिए। फिर भी वह ठहरा हुआ है तो हम खरीदने के लिए लपकते हैं। लेकिन सावधान! इस स्थिति में संस्थाएं बेचने को तैयार बैठी रहती हैं और अगले कुछ दिनों में उस शेयर में भारी गिरावट आ सकती है। अब नज़र डालते हैं शुक्रवार की मनोदशा पर…औरऔर भी

कमोडिटी, फॉरेक्स या स्टॉक ट्रेडिंग मूलतः किसी अन्य व्यापार जैसी है। लेकिन इसमें कई विशिष्टताएं और स्तर हैं। बाज़ार जब ट्रेंड में चल रहा हो, तब दूसरा प्रपत्र और जब सीमित रेंज में भटक रहा हो, तब कोई दूसरा प्रपत्र। हर स्थिति में यहां कमाई का ज़रिया निकाला गया है। जैसे, बाज़ार जब सीमित दायरे में हो, तब कमाई के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग में ‘बटरफ्लाई’ नाम की रणनीति अपनाई जाती है। अब पकड़ते हैं गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

यूरोप, अमेरिका और एशिया, खासकर जापान की भारी गिरावट ने मंगलवार की सुबह साफ संकेत दे दिया था कि भारतीय बाज़ार में भारी गिरावट आ सकती है। लेकिन सेंसेक्स 3.07% और निफ्टी 3% गिर जाएगा, इसका अंदेशा किसी को नहीं था। यह 3 सितंबर 2013 के बाद किसी एक दिन में आई सबसे तगड़ी गिरावट है। डर इतना गहरा कि निफ्टी के 50 में से 48 शेयर गिरे गए। ऐसे में क्या होनी चाहिए ट्रेडिंग की रणनीति…औरऔर भी

निवेश/ट्रेडिंग उनके लिए है जिनके पास ज़रूरत से ज्यादा धन है। जो ऐसी स्थिति में नहीं हैं, उन्हें पहले कोई कामधाम करके कमाने का इंतज़ाम करना चाहिए। लेकिन जिनके पास पूंजी है, उन्हें भी ज्यादा लाभ की जगह अपनी पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। पर अक्सर होता यह है कि ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में हम मतिभ्रम का शिकार हो जाते हैं और अपनी आधार पूंजी गंवा बैठते हैं। अब करें मंगलवार का अभ्यास…औरऔर भी