बाज़ार में निपटें इंसानी कमज़ोरियों से
वित्तीय बाज़ार को समझने और पकड़ने के लिए कोशिश अर्थशास्त्र के जनक एडम स्मिथ के ज़माने से ही हो रही है। एक राय यह है कि भाव सभी पुरानी व नई उपलब्ध सूचनाओं के अलावा भावी संभावनाओं को भी जज्ब किए होते हैं। इसलिए अब तक के भावों का विश्लेषण कल के भावों का एकदम सटीक हाल बता देगा। वहीं, दूसरी राय इंसान की स्वभावगत कमज़ोरियों को भी तवज्जो देती है। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी
सबसे अच्छा निवेश जैसा कुछ नहीं
अप्रैल 2011 में 115 पर खरीदने को सुझाया सुप्रीम इंडस्ट्रीज अप्रैल 2015 में 745 पर पहुंच गया। मई 2014 में 45 पर सुझाई गई कंपनी अभी 100 के आसपास है। चाहें तो हम दावा कर सकते हैं, हमारी निवेश सलाह सबसे अच्छी होती हैं। लेकिन सबसे अच्छा निवेश जैसी कोई चीज़ नहीं होती। रिस्क और रिटर्न का अभिन्न नाता ही निवेश की आत्मा है। 100 पर पहुंची कंपनी दे सकती है और 40% रिटर्न…और भीऔर भी
रिस्क को संभालने से होती है कमाई
ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं तो गांठ बांध लें कि शेयरों के भाव या बाज़ार का कोई भी पूर्वानुमान 100% सही नहीं हो सकता। यहां प्रायिकता चलती है। सिक्का उछालने पर हेड/टेल आने की प्रायिकता 50% रहती है। वैसे ही बाज़ार में प्रायिकता चलती है। हम ज्यादा प्रायिकता वाले सौदे चुनते हैं और चूकने पर चोट न खाएं, इसके लिए स्टॉप लॉस या पोजिशन साइजिंग का सहारा लेते हैं। अब करते हैं नए संवत का पहला अभ्यास…औरऔर भी
जीएसटी अप्रैल नहीं, अक्टूबर 2016 से लाने की तैयारी, टैक्स 20% से कम
इसे माल व सेवा कर कहिए या वस्तु एवं सेवा कर, अंततः इसे जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) के रूप में ही बोला, जाना और कहा जानेवाला है। देश में 1986 से ही इसकी अवधारणा पर काम चल रहा है। लेकिन इसके अमल में बराबर कोई न कोई दिक्कत आ जाती है। यह आज़ादी के बाद देश में परोक्ष या अप्रत्यक्ष करों का सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण सुधार है। असल में, इसके लागू होने से देश मेंऔरऔर भी






