दीये की लौ को देखिए। अंधेरे के आखिरी छोर तक बढ़ते गए उसके वलय की लहरों को देखिए। देखना चाहेंगे तो आपको दशकों नहीं, सदियों पुराना इतिहास दिख जाएगा। नहीं चाहेंगे तो बस इतना दिखेगा कि पहले घी के दीये जलते थे, खेतों की मेड़ों और घरों की मुंडेरों पर। दीये फिर तेल के हुए और अब बहुत हुआ तो पामोलिन या सस्ते वनस्पति के दीये जलते हैं। नहीं तो मोमबत्ती के बने-बनाए दीयों की भरमार है।औरऔर भी

ट्रेडर, निवेशक, विश्लेषक सभी जानना चाहते हैं कि बाज़ार आगे कहां जाएगा, कोई शेयर कहां पहुंचेगा। लेकिन इस बाज़ार की विचित्र हकीकत यह है कि यहां एक ही वक्त एक ही स्टॉक या सूचकांक को लेकर लोगों की राय एक-दूसरे से उलट होती है। ऐसा न हो तो बाज़ार ठप पड़ जाए, कोई ट्रेडिंग ही न हो। बाज़ार एकदम बर्फ की मानिंद जम जाए। धारणा विपरीत तो अनुमान कैसे हों एक! अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

सारे एक्जिट पोल गलत निकले। बस, एक्सिस-एड प्रिंट मीडिया का एक्जिट पोल ही सही निकला जिसमें उसने बिहार में महागठबंधन को 169 से 183 और एनडीए को 58 से 70 सीटें मिलने की बात कही थी। वही हुआ। पर, टीवी18 समूह ने उसे दिखाया नहीं क्योंकि वो उनकी सोच से मेल नहीं खाता था। भविष्य की गणना में ऐसी भूलचूक का होना स्वाभाविक है। शेयर बाज़ार भी इसका अपवाद नहीं है। अब पकड़ते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार का गिरना लंबे समय के निवेशकों के लिए अक्सर अच्छा होता है क्योंकि इस दौरान तमाम मजबूत कंपनियों के शेयर भी गिर जाते हैं। ऐसे मौके पर इन्हें पकड़ लेना मुनाफे का सौदा साबित होता है। आज हम तथास्तु में ऐसी कंपनी पेश कर रहे हैं, मजबूती के बावजूद जिसके शेयर गिरकर इधर अपने अंतर्निहित मूल्य के काफी करीब पहुंच गए हैं। इसमें अभी निवेश करना तीन साल में 35% से ज्यादा रिटर्न दे सकता है।औरऔर भी

कैलिफोर्निया के एक प्रोफेशनल ट्रेडर हैं। बड़े बैंकों व संस्थाओं में रह चुके हैं। बड़ी ईमानदारी से डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की सलाह देते हैं। हाल ही उन्होंने निफ्टी ऑप्शंस में अल्गो-आधारित ट्रेडिंग सेवा शुरू की है। साल का सब्सक्रिप्शन एक लाख रुपए। हाल के उनके वेबिनार में सवाल उठे कि उनकी पुरानी सलाहें लगातार पिट क्यों रही हैं? सबक यह कि ट्रेडिंग में कोई भी अकाट्य नहीं; दूसरा मदद भर कर सकता है। अब शुक्र का अभ्सास…औरऔर भी