स्टॉक जाता किस हाथ से किस हाथ!
स्टॉक्स को चुनने व समझने में टेक्निकल चार्ट काम आते हैं। लेकिन चार्ट अपने-आप में पर्याप्त नहीं क्योंकि वे पुराने भावों से बनते हैं और, हम समय में पीछे जाकर ट्रेड नहीं कर सकते। चार्ट की उपयोगिता यह है कि हम उससे अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कोई स्टॉक कमज़ोर हाथों (डे-ट्रेडरों व सटोरियों के हाथों) से मजबूत हाथों (इनसाइडरों, प्रॉपराइटरी ट्रेडरों व संस्थाओं) में जा रहा है या स्थिति इससे उलट है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
बनाएं अपना सिस्टम, चुनकर करें ट्रेड
खुद को बड़ा उस्ताद बताने वालों के पास असल में कोई नई खबर नहीं होती। होती भी है तो बहुत पहले पिट चुकी होती है। खुद का उल्लू सीधा करना ही इनका मकसद है। इसलिए इनके किसी भी संदेश को तवज्जो नहीं देना चाहिए। ऐसे टिप्स देने वाले तो आजकल सोशल मीडिया पर भी छाने लगे हैं। उन्हें छोड़िए। अपना सिस्टम बनाइए। काम के 10-15 स्टॉक्स चुनिए, उनका स्वभाव समझिए और ट्रेड कीजिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना मंजूर की, खरीफ से अमल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ को मंजूरी दे दी। यह योजना इसी साल खरीफ सीजन से लागू हो जाएगी। इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “यह एक ऐतिहासिक दिन है। मेरा विश्वास है कि किसानों के कल्याण से प्रेरित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन लाएगी।” सरकार की तरफ से जारी सूचना में कहा गया है कि किसानों केऔरऔर भी
समझिए उनकी चाल और मुस्कराइए
सनसनी महज न्यूज़ चैनलों पर ही नहीं, शेयर बाज़ार में भी फैलाई जाती है। स्मार्टफोन से खटाखट संदेश भेजे जाते हैं। अब तो व्हाट्स अप का ज़माना है। किसी वाहियात कंपनी का नाम लेकर बताते हैं कि बड़ा ब्रोकिंग हाउस उस पर खरीद रिपोर्ट जारी करनेवाला है। रिपोर्ट आते ही 22 रुपए से अगले हफ्ते यह शेयर 50 तक पहुंच जाएगा। इसलिए फटाफट खरीद लें। वरना पछताएंगे। उनकी इस चाल में फंसे बगैर देखें बुध की बुद्धि…औरऔर भी
मानसिक रूप से बीमार हैं ये शोबाज़
बाज़ार में अफवाह फैलाने के पीछे शोबाज़ मानसिकता के ही लोग होते हैं। दिखाते ऐसे हैं कि रतन टाटा, मुकेश अंबानी या कुमारमंगलम बिड़ला तक इनकी सीधी पहुंच हो। वित्त मंत्रालय के आला अधिकारियों और वित्त मंत्री अरुण जेटली को तो ये लोग जेब में लिए टहलते हैं। असल में ये लोग मानसिक रूप से बीमार होते हैं। इसलिए हमें न तो उनका अपमान करना चाहिए, न ही उन्हें कोई अहमियत देनी चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी





