वित्तीय बाज़ार बड़ा छलिया है। लगातार पांच-दस दिन अंदाज़ सही बैठता है तो किसी को भी लगने लगता है कि वो तो बाज़ार का मास्टर हो गया। लेकिन अगले ही दिन बाज़ार ऐसा गच्चा देता है कि सारी कमाई एक दिन में स्वाहा हो जाती है। अंदाज़ या गणना का आधार पुराना पैटर्न होता है और पुराना पैटर्न आगे दोहराया जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए बाज़ार में अहंकारी नहीं, विनम्र बनिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

जिस तरह बड़े-बड़े ज्योतिषी तक भविष्य को कभी नहीं बांध सकते, उसी तरह बाज़ार को बांधना किसी के वश की बात नहीं। हम क्या हो सकता है, उसकी प्रायिकता की गणना भर सकते हैं। एनालिस्ट लोगों को बोलने दीजिए कि सेंसेक्स या निफ्टी अगली दीवाली तक कहां जाएगा क्योंकि यही उनका धंधा है। लेकिन हमें तो गांठ बांध लेनी चाहिए कि बाज़ार से पंगा लेना पहाड़ से सिर टकराने जैसा है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अक्सर लोगबाग पूछते हैं कि शेयर बाज़ार यहां से आगे कहां जाएगा? यह उन लोगों को सोच है जो या तो एकदम नौसिखिया हैं या ताज़िंदगी छिछली खिलाते रह गए। प्रोफेशनल ट्रेडर कभी नहीं सोचता/पूछता कि बाज़ार आगे कहां जाएगा। इस सवाल पर उसका जवाब होता है – बाज़ार कहीं भी जाए, मेरी बला से! वो देखता है कि बाज़ार की चाल दरअसल क्या है जिसके हिसाब से वो ट्रेड करता है। अब पकड़िए मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

भविष्य की बात कौन नहीं जानता चाहता! आम जीवन में लोग इस कुतूहल को शांत कर थोड़ा आश्वस्त हो जाते हैं, जबकि शेयर बाज़ार में लोग इससे नोट बनाना चाहते हैं। लेकिन पक्की बात यह है कि भविष्य के बारे में भगवान भी कुछ पक्का नहीं कह सकता। उसको लेकर महज कयास लगाए जा सकते हैं। शेयर बाज़ार में इसे ही सट्टेबाज़ी या सटोरियापन कहते हैं। लेकिन ट्रेडिंग इससे आगे की चीज़ है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार फिलहाल ढलान पर है। ठीक पिछले एक साल में बीएसई सेंसेक्स 13.04% गिरा है, जबकि स्मॉल कैप सूचकांक 4.66% ही गिरा है। सेंसेक्स 18.15 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि स्मॉल कैप सूचकांक 56.25 के पी/ई पर। ऐसे में बाज़ार में आगे छोटी कंपनियों के शेयरों का बुलबुला फट सकता है। इसलिए सावधान रहने की ज़रूरत है। पर, अच्छी छोटी कंपनियों के आने का क्रम बना रहता है। ऐसी ही एक अच्छी कंपनी…औरऔर भी