बजट नहीं, समझें बाजार का स्वभाव
नए वित्त वर्ष 2017-18 का बजट आ गया। अगले कुछ दिन जानकार लोग इसके विश्लेषण में लगे रहेंगे। जीएसटी का अहम सुधार बाद में लागू किया जाना है। वैसे, खांटी ट्रेडरों के लिए खबरों का बहुत ज्यादा मायने-मतलब नहीं होता। वे तो वित्तीय बाजार के स्वभाव से खेलने हैं जो कभी सीधी रेखा में नहीं चलता। हमेशा ऊपर-नीचे होता रहता है। लहर की हर डुबकी उनके लिए कमाने का मौका होती है। अब पकड़ें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
बजट के दिन ट्रेडिंग करना खतरनाक
अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अहम सालाना अनुष्ठान आज संपन्न होने जा रहा है। सबकी निगाहें कम से कम दोपहर दो बजे तक टीवी पर चिपकी रहेंगी कि वित्त मंत्री क्या-क्या घोषणा करने जा रहे हैं। बाज़ार की सांस उसी हिसाब से ऊपर-नीचे होती रहेगी। फिलहाल माहौल में उम्मीदों के बजाय निराशा का पुट ज्यादा दिख रहा है। ऐसे में ज़रा-सी खबर बड़ी हलचल का सबब बन सकती है। ट्रेडिंग में खतरा ज्यादा है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
सरकार लेती है जितना ऋण, चला जाए 92% पुराना ब्याज चुकाने में
कालेधन को साफ करने की जिस वैतरणी के लिए सरकार ने देश के 26 करोड़ परिवारों को तकलीफ की भंवर में धकेल दिया, वह दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती हमारी अर्थव्यवस्था के लिए कर्मनाशा बनती दिख रही है। आईएमएफ जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगठन तक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का अनुमान 7.6 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है, जबकि चीन का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। यह केंद्र सरकारऔरऔर भी
बजट से ज्यादा नहीं, बस चंद उम्मीद
बाज़ार चाहता है कि अर्थव्यवस्था को विकास अच्छी रफ्तार से हो। लोगों के पास ज्यादा खर्च करने की क्षमता हो। इसलिए इनकम टैक्स में छूट की सीमा ढाई से बढ़ाकर कम से कम चार लाख कर दी जाए। लेकिन अगर कैपिटल गेन्स टैक्स से कोई नकारात्मक छेड़छाड़ की गई, सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाया गया तो बाजार नाराजगी भी जता सकता है। लेकिन मोदी सरकार के लिए साहसिक सुधार का यह आखिरी बजट है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
सावधान! हफ्ता खबरों व नीतियों का
यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित करनेवाली बड़ी नीतियों का हफ्ता है। कल से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। पहले दिन आर्थिक समीक्षा पेश की जाएगी। उसके अगले दिन, 1 फरवरी को वित्त मंत्री अरुण जेटली अपना तीसरा बजट पेश करेंगे। वे बजट में विदेशी निवेशकों को नाराज़ करने का जोखिम नहीं उठा सकते। लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से चंद दिन पहले मतदाता को भी कतई हैरान-परेशान नहीं करेंगे। अब परखें सोम का व्योम…औरऔर भी





