देश में एक बार फिर विकसित भारत और ट्रिलियन-ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का राग बजना शुरू हो गया है। फर्क बस इतना है कि इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गेंद राज्यों के पाले में डालकर निश्चिंत हो गए हैं। उन्होंने खुद को नाम जपने तक सीमित कर लिया है। पिछले हफ्ते 103 रेलवे स्टेशनों का लोकार्पण एक साथ किया और इन्हें अभी से विकसित भारत के अमृत भारत स्टेशन घोषित कर दिया। फिर शनिवार को नीति आयोग की दसवींऔरऔर भी

प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोलें तो समझ में आता है क्योंकि उन्हें झूठ बोलने की आदत और असाध्य बीमारी है। झूठ बोलना उनका संस्कार है। यह अकारण नहीं है कि प्रधानमंत्री पद की मर्यादा को बचाने के लिए आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार उनके शासन में भारतीय संसद की कार्यवाही में झूठ शब्द को ही असंसदीय घोषित कर दिया गया। सरकार के मंत्री और भाजपा नेता झूठ बोले तो भी स्वीकार्य है क्योंकि उन्हें राजनीतिऔरऔर भी

देश में इस समय वर्तमान या भविष्य का अमृतकाल नहीं, बल्कि अतीत का वैदिक काल चल रहा है। वेदों में शब्द को ही प्रमाण और कह देने से हो जाने की धारणा थी। ईश्वर ने कहा कि एकोहम बहुष्याम तो एक से अनेक बनते चले गए। भाजपा व संघ की शरण में गए सारे गण व अधिकारी इसी धारणा के संवाहक हैं। नीति आयोग के सीईओ बनाए गए बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने भारतीय अर्थव्यवस्था के 4.19 ट्रिलियन केऔरऔर भी

राजा चौपट हो तो सत्यमेव जयते के आदर्श वाले महान देश भारत को भी अंधेर नगरी बनने में देर नहीं लगती। आईएमएफ ने करीब डेढ़ महीने पहले 14 अप्रैल 2025 को जारी वर्ल्ड इकनॉमिक रिपोर्ट में अनुमान जताया था कि विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर घटकर कैलेंडर वर्ष 2025 में 2.8% और 2026 में 3% रह सकती है। इसी रिपोर्ट में कहा गया था कि कैलेंडर वर्ष 2025 या वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का जीडीपी 4.187औरऔर भी

शेयर बाज़ार कभी सीधी रेखा में नहीं चलता। गिरते-गिरते उठ जाना और उठते-उठते गिर जाना उसका स्वभाव है। 25 मार्च को निफ्टी ऊपर में 23,750 से 7 अप्रैल को नीचे में 21750 तक गिर गया। फिर उठा तो 15 मई को 25,115 तक जाने के बाद नीचे उतर गया। ठीक उस वक्त जब अच्छे-खासे निवेशक व ट्रेडर एक दिशा पकड़ चुके होते हैं, तभी बाज़ार दूसरी दिशा पकड़ लेता है। बाज़ार की ऐसी हरकत अनायास नहीं। इसकेऔरऔर भी