इस्पात इंडस्ट्रीज के प्रवर्तक कंपनी में अपनी इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाकर 46 फीसदी करेंगे। उनकी मौजूदा इक्विटी हिस्सेदारी लगभग 41 फीसदी है। असल में कंपनी के निदेशक बोर्ड के कल ही अपनी बैठक में तय किया है कि प्रवर्तकों को वरीयता आधार पर इक्विटी शेयर वारंट जारी किए जाएंगे। ये वारंट आवंटन के 18 महीने बाद इक्विटी शेयर में बदले जा सकते हैं। अभी बोर्ड के इस फैसले को कंपनी के शेयरधारकों की असाधारण आमसभा (ईजीएफ) में पासऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 गुजर गया। लेकिन यह साल जाते-जाते शेयर बाजार के निवेशकों की पूंजी दोगुनी करके गया है। अगर लिस्टेड कंपनियों के शेयर भावों को आधार बनाएं तो बाजार का पूंजीकरण अब 60 लाख करोड़ रुपए का स्तर पार गया है जो पिछले साल के स्तर से लगभग दोगुना है। हालांकि ये सारा सांकेतिक मामला है। लेकिन मानने में क्या हर्ज है कि भारतीय निवेशक पहले से दोगुने अमीर हो गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) मेंऔरऔर भी

देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई नए वित्त वर्ष में अपनी पहुंच देश के दूरदराज के इलाकों तक बढ़ाने के लिए 15,000 नए बैंकिंग संवाददाताओं (बीसी) की नियुक्ति करेगा। यह जानकारी खुद बैंक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक ओ पी भट्ट ने एक प्रमुख अंग्रेजी आर्थिक अखबार से हुई बातचीत में दी। इससे बैंक ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है। बैंकिंग संवाददाता को बढ़ाना वित्तीय समावेश को व्यापक बनाने के लक्ष्य का एक हिस्साऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष के पहले दिन 1 अप्रैल को रात 12 बजे से ही दिल्ली और मुंबई समेत देश के 13 बड़े शहरों में पेट्रोल व डीजल 50 पैसे प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। इन शहरों में आज से यूरो-चार ग्रेड का पेट्रोल व डीजल सप्लाई किया जाएगा। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 50 पैसे बढ़कर 47.93 रुपए प्रति लीटर और डीजल 26 पैसे बढ़कर 38.10 रुपए प्रति लीटर हो गया है।औरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2010-11 का पहला दिन बैंकों में अपना पैसा बचत खाते में रखनेवाले करोड़ों आम लोगों के लिए शानदार तोहफा लेकर आया है। इस खाते पर ब्याज की दर तो पहले की तरह 3.5 फीसदी सालाना ही है। लेकिन अब इसे हर दिन के बैलेंस पर गिना जाएगा, जबकि अभी तक बैंक महीने की 10 तारीख और आखिरी तारीख तक खाते में सबसे कम बैलेंस राशि पर ब्याज देते रहे हैं। इसलिए पहले जहां बचतऔरऔर भी

“हम उस दौर में रह रहे हैं जहां समय भी पूंजी है और कोई भी जीवन की दौड़ में किसी से पीछे रहने को तैयार नहीं हैं। लेकिन इस भागमभाग में समय को नाथना जरूरी है। उसका नियोजन जरूरी है। नहीं तो समय बड़ी बेरहमी से हमें कुचलता हुआ आगे निकल जाता है।”और भीऔर भी

“पहले कहा जाता था कि जिसकी कोई मंजिल नहीं होती, वह कोई भी राह पकड़कर, लहरों पर सवार होकर कहीं न कहीं पहुंच जाता है। लेकिन आज की हकीकत यह है कि जिसकी कोई मंजिल नहीं होती, कोई ध्येय नहीं होता, कोई भी राह या लहर उसे कहीं नहीं पहुंचाती।”और भीऔर भी

हम हिंदुस्तानियों के साथ मुश्किल यह है कि हम में से बहुतेरे लोग नई से नई समस्या का भी समाधान पुराने सूत्रों में खोजते हैं। झुमका गिरा है बरेली में और उसे ढूंढने निकल पड़ते हैं श्रावस्ती में। आज के समाधान के लिए गुजरे हुए कल को टटोलते हैं। पूरी गरदन 90 से 180 डिग्री तक मोड़ देते हैं। मुड़-मुड़के देखने के आदी हो गए हैं हम। सवाल उठता है कि जो चीज़ आज घट रही है,औरऔर भी

किसी आदमी को खत्म करने का सबसे आसान तरीका है कि उसके आत्मविश्वास को खत्म कर दो। और, पूरी की पूरी पीढ़ी को खत्म करने का भी यही फॉर्मूला है। कई बार सोचता हूं कि हम अपनी बातों की पुष्टि के लिए पुराने लोगों का सहारा क्यों लेते हैं। गीता में भगवान कृष्ण ने कहा था, महात्मा बुद्ध ने ज्ञान दिया था, तुलसीदास रामचरित मानस में कहते हैं, कबीर कहते थे, रहीम बोले थे, गांधी का कहनाऔरऔर भी

इसलिए नहीं कि उल्लू रात के अंधेरे में देखता है और हम चारों तरफ अंधकार से घिरे हैं, बल्कि इसलिए कि कौए की आंखें सिर के दो तरफ होती हैं और वह एक बार में एक ही तरफ देख पाता है, इसलिए हमेशा ‘काक-चेष्ठा’ में गर्दन हिलाता रहता है। जबकि उल्लू की आंखें चेहरे पर सीधी रेखा में होती हैं। वह कौए की तरह किसी चीज़ को एक आंख से नहीं, बल्कि दोनों आंखों से बराबर देखताऔरऔर भी