मोदी सरकार जनता की कीमत पर अपने मित्रों और अपना खज़ाना भरने में कितनी तत्पर है, इसका ताज़ा उदाहरण है रूस से किया जा रहे सस्ते कच्चे तेल का आयात। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव ने बिना नाम लिए आरोप लगाया है कि इससे मुकेश अंबानी ने 1600 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा कमाया है। कमाल है कि सरकार ने इस साल अप्रैल में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी घटाने के बजाय प्रति लीटर दो रुपए बढ़ा दी। सरकारऔरऔर भी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर मॉस्को तक में रोना रो रहे हैं कि चीन रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और भारत काफी कम। फिर भी भारत पर 25% टैरिफ के ऊपर 25% पेनाल्टी क्यों? इसका जवाब अमेरिका के दो शीर्ष पदाधिकारी पहले ही दे चुके हैं, जिसे जयशंकर सुनना नहीं चाहते। वहां के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेस्सेंट का जवाब है कि चीन य़ूक्रेन युद्ध के पहले रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है। पहलेऔरऔर भी

शेयर बाज़ार डर और लालच की आदिम भावनाओं से चलता है। अक्सर ये भावनाएं इतनी हावी हो जाती हैं कि कंपनियों की मूलभूत स्थिति कोई मायने ही नहीं रखती। कंपनी का कोई धंधा ही नहीं। है भी तो अभी चल नहीं रहा। फिर भी उसके शेयर आसमान छूने लगते हैं। अडाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर इसका शानदार उदाहरण रहा है, जब सच्चाई को नज़रअंदाज़ लालच उसके सिर चढ़कर बोल रहा था। हालांकि कभी-कभी कंपनियों के प्रवर्तकों सेऔरऔर भी

मार्च 2020 में जब चीन से कोरोना फटकर सारी दुनिया में फैला तो कहा गया कि यह आपदा भारत के लिए शानदार अवसर है। दुनिया ‘चाइना प्लस वन’ नीति अपनाएगी और इसका भरपूर फायदा भारत को मिलेगा। लेकिन पांच साल बाद पता चला कि सारा फायदा बांग्लादेश, वियतनाम, इंडोनेशिया व मलयेशिया जैसे देश ले गए। ऊपर से चीन भारत में घुसता चला गया और हमारी सारी मैन्यूफैक्चरिंग चीन पर निर्भर हो गई। आज उस प्रसंग को भुलाकरऔरऔर भी