आपने गौर किया होगा कि पिछले कुछ दिनों से शेयर बाजार की सांस जल्दी उखड़ जाती है। खुलता तो है गैप के साथ बढ़कर। लेकिन फिर यह बढ़त संभाल नहीं पाता। दिन भर थोड़ी-बहुत तेजी आती है। निफ्टी ज्यादातर सीमित दायरे में भटकता है। कारोबार की समाप्ति तक इतना बढ़ नहीं पाता कि खुलने पर खरीदनेवाले ट्रेडर को शाम तक इंतज़ार करने का वाजिब रिवॉर्ड मिल सके। इससे भी रिटेल ट्रेडरों का नज़रिया दिन नहीं, घंटों वऔरऔर भी

इधर दो-तीन हफ्ते में ही अपने शेयर बाज़ार में खास बदलाव आया है कि उसकी इंट्रा-डे उछलकूद काफी घट गई है। जहां पहले महीनों तक निफ्टी दिन में 200-250 या 300 अंकों तक के दायरे में ऊपर-नीचे होता था, वहीं अब उसका दायरा 100-120 या 130 अंकों तक सिमट गया है। पिछले हफ्ते शुक्रवार को तो उसका दायरा महज 70 अंकों का रहा था। यह बाज़ार में व्यग्रता का कम होना नही, बल्कि बढ़ना दिखाता है। ट्रेडरोंऔरऔर भी

नौसिखिया ट्रेडरों/निवेशकों को किनारे रख दें तो शेयर बाज़ार का सेंटीमेंट फिलहाल दो चीजों से निर्धारित हो रहा है, कंपनियों के सालाना नतीजे और बाहर से आ रहा सस्ते धन का प्रवाह। कंपनियों ने कोरोना व लॉकडाउन से घिरे बीते वित्त वर्ष में अमूमन 25-30% कम कर्मचारियों से काम चलाया तो इसी अनुपात में उनका शुद्ध लाभ बढ़ गया। बाज़ार कितने लोगों की नौकरियां गईं, इसकी नहीं, मुनाफा कितना बढ़ा, इसकी परवाह करता है तो कंपनियों केऔरऔर भी

इस समय हमारा शेयर बाजार रिटेल निवेशकों के हाथ में है। इनमें से अधिकांश 18 से 35 साल के नौजवान हैं। वे बाज़ार में तुरत-फुरत फायदा कमाने के लिए उतरे हैं। किसी फंडामेंटल या टेक्निकल एनालिसिस, देश-विदेश की राजनीति या धन के वैश्विक प्रवाह नहीं, बल्कि इधर-उधर की टिप्स या इन्ट्यूशन के आधार पर खरीदते-बेचते हैं। फिर थोड़ा-सा मुनाफा काटकर निकल जाते हैं। इन पतंगों का शिकार करने के लिए बहुतेरी छिपकलियां बाहर निकल आई हैं। दिक्कतऔरऔर भी

देश में 30 अप्रैल 2021 तक शेयर बाज़ार में निवेश के लिए ज़रूरी 5.69 करोड़ डीमैट एकाउंट खुल चुके हैं। इनमें से करीब 1.40 करोड़ एकाउंट बीते वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान खुले, जब देश कोरोना की पहली लहर की चपेट में था। जब सब कुछ सामान्य था, तब पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में लगभग 49 लाख और उससे पहले 2018-19 में करीब 40 लाख डीमैट एकाउंट ही खुले थे। आर्थिक सुस्ती व लॉकडाउन के दौरान डीमैटऔरऔर भी