बरबादी के आसार, रिटेल के हाथों में बाज़ार!
शेयर बाज़ार इस समय एफआईआई, डीआईआई और ब्रोकरों की प्रॉपराइटरी फर्मों से निकलकर रिटेल ट्रेडरों के हवाले हो गया है। बड़े संस्थागत निवेशक कोई दांव नहीं खेलना चाहते, जबकि रिटेल ट्रेडरों ने बदहवास होकर उछल-कूद मचा रखी है। हर्षद मेहता से लेकर 1998 का दक्षिण-पूर्व एशिया के मुद्रा संकट और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट तक का सबक हमारे पास है कि ऐसे ही दौर में बाज़ार खटाक से ज़मीन पकड़ लेता है। जब तक दूसरे मूर्खऔरऔर भी
प्रोफेशनल ट्रेडरों की नज़र में सब कुशल नहीं
प्रोफेशनल ट्रेडर की खासियत है कि वे बाज़ार की स्थिति को हमेशा बिना किसी पूर्वाग्रह के, जो जैसा है, वैसा समझने में लगे रहते हैं। मसलन, इधर एफआईआई ने निफ्टी फ्यूचर्स में अपना एक्सपोज़र अप्रैल के शिखर से करीब-करीब 60% घटा दिया है। स्टॉक फ्यूचर्स में भी वे एक्सपोज़र लगभग एक-तिहाई घटा चुके हैं। ब्रोकरों के प्रॉपराइटरी ट्रेड पर गौर करें तो वे भी निफ्टी फ्यूचर्स के गिरने के अनुमान के साथ सौदे करते दिख रहे हैं।औरऔर भी
प्रोफेशनल ट्रेडर सिस्टम बनाकर करते हैं ट्रेड
प्रोफेशनल ट्रेडर भी रिटेल ट्रेडर की ही श्रेणी में गिने जाते हैं। लेकिन वे किसी इन्ट्यूशन या टिप्स पर नहीं, बल्कि अपना अलग सिस्टम बनाकर ट्रेड करते हैं। यह सिस्टम मोटे तौर पर टेक्निकल एनालिसिस पर आधारित होता है। मगर हर प्रोफेशनल ट्रेडर अपने हिसाब से इंडीकेटर चुनता और कुछ नई ‘विद्या’ जोड़ता है। मसलन, भावों के चार्ट से यह पढ़ना कि किसी स्टॉक में संस्थागत निवेशक कब खरीद-बिक्री शुरू करते हैं। वे अपने अभ्यास, रुझान वऔरऔर भी
डर बुलबुला फटने का, पर बढ़े जा रहा बाज़ार
बुलबुले के फटने की तमाम आशंकाओं को धता बताते हुए दुनिया के साथ भारतीय शेयर बाज़ार भी इस समय बढ़े चले जा रहा है। बीच-बीच में दम मारने जैसे मामूली करेक्शन आते रहते हैं। लेकिन हम कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में एफआईआई, डीआईआई और प्रॉपराइटरी फर्मों की खरीद-फरोख्त पर ध्यान दें तो उनकी सक्रियता का पैटर्न पिछले एक महीने से बदलता हुआ नज़र आ रहा है। वे काफी सतर्कता बरते रहे हैं, जबकि रिटेल ट्रेडर एकदम बेपरवाहऔरऔर भी
जीतोगे तब जब पता हो सामने है कौन-कौन
जिस तरह युद्ध में कभी दोनों पक्ष नहीं जीतते, हमेशा एक पक्ष जीतता और दूसरा हारता है, उसी तरह शेयर बाज़ार में हमेशा एक की जीत और दूसरे की हार होती है। इसलिए मैदान में उतरी पैदल सेना को पता होना चाहिए कि उसका मुकाबला किन-किन महारथियों से है। रिटेल ट्रेडर को जानना ज़रूरी है कि उसका मुकाबला तीन प्रमुख संगठित शक्तियों या महारथियों से है। ये हैं विदेशी संस्थागत निवेशक या एफआईआई, देशी निवेशक संस्थाएं याऔरऔर भी





