कंपनी का बिजनेस अच्छा चल रहा है या नहीं, इसका बड़ा साफ पैमाना होता है उसका लाभांश देने का ट्रैक रिकॉर्ड। लाभ बढ़ाकर दिखाने में कंपनियां उलटफेर कर सकती हैं। इसलिए इस पर पक्का भरोसा नहीं किया जा सकता है। लेकिन लाभांश देने में वे कलाकारी नहीं कर सकतीं। इससे शेयरधारकों के प्रति कंपनी की संवेदनशीलता और प्रबंधन की प्रतिबद्धता का भी पता चलता है। शेयर बाज़ार दबा हो, कंपनी को कम भाव मिल रहा हो तोऔरऔर भी

आपने ध्यान दिया होगा कि कभी-कभी ढाई बजे के आसपास शेयर बाज़ार का रुख एकदम पलट जाता है। निफ्टी/सेंसेक्स अचानक दिशा बदल लेते हैं। यह बाज़ार में सुनियोजित बिकवाली या खरीद का प्रभाव है। जानकार लोग इसे फैंटम प्रभाव कहते हैं। इसमें ऑपरेटर या बड़े देशी संस्थान चुनिंदा सौदों से चंद मिनट में बाज़ार का रुख बदल देते हैं। वे निफ्टी/सेंसेक्स के शेयरों में से चार-पांच को चुनकर खरीद-बिक्री का ऐसा खेल करते हैं कि व्यापक बाज़ारऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में लंच-टाइम में अल्गोरिदम बनाकर सौदा करनेवाले ट्रेडर बड़े उस्ताद होते हैं। उनके जटिल खेल का अंदाज़ा तब लगता है जब स्टॉक्स के भावों में काफी उतार-चढ़ाव के चलते दूसरे ट्रेडरों के स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने लगते हैं। समझदार ट्रेडर हमेशा स्टॉप-लॉस का पालन अनुशासन व कड़ाई के साथ करते हैं। लेकिन लंच-टाइम में जब वोल्यूम कम और ओपन इंटरेस्ट घट रहा होता है, तब भावों के पैतरों को देखकर उस्तादों के भी होश फाख्ता होऔरऔर भी

कहा जाता है कि शेयर बाज़ार खोलते हैं नौसिखिया रिटेल ट्रेडर, जबकि बंद करते हैं प्रोफेशनल ट्रेडर। लंच के दौरान शेयर बाज़ार में अमूमन सन्नाटा रहता है। अधिकांश लोग निश्चित समय पर एकदम निश्चिंत होकर लंच करते हैं। केवल अल्गोरिदम ट्रेडिंग चलती है। यह सिस्टम आधारित ऑर्डर एंट्री होती है जिन्हें ग्रे व ब्लैक बॉक्स से जुड़े सॉफ्टवेयर मशीनी ढंग से पूरा करते हैं। करीब एक से ढाई बजे तक बाज़ार का वोल्यूम काफी घट जाता है।औरऔर भी