जो चलाते भाव, उन इंसानों को चलाता कौन?
जो इंसान शेयर बाज़ार में भावों को चलाते हैं, आखिर उनको कौन चलाता/चलाती है? दरअसल, उनको चलाती हैं इंसान के अंदर समाई लालच व डर की दो प्रबल भावनाएं। छोटा हो या बड़ा, व्यक्ति हो या संस्था, हर कोई लाभ कमाने के मकसद से ही शेयर बाज़ार में उतरता है। कोई तेज़ी का माहौल का हामी होता है और खरीदने के बाद बेचकर कमाता है तो कोई मंदी का हामी होता है और बेचने के बाद खरीदकरऔरऔर भी
भाव ही भगवान, मगर भावों को चलाता कौन!
शेयर बाज़ार में ट्रेडरों के बीच अरसे से कहा जाता रहा है कि भाव ही भगवान है। लेकिन इन भावों को इंसान ही चलाते हैं। हो सकता है कि वे देशी-विदेशी निवेश संस्थाओं, म्यूचुअल फंडों या बीमा कंपनियों में काम करते हों, प्रोफेशनल ट्रेडर हों या ऐसे ट्रेडर हों जो सुबह से शाम तक शेयर बाज़ार में डटे रहते हैं। यहां तक कि अल्गोरिदम ट्रेडिंग के पीछे भी अंततः इंसान ही होते हैं। इन सबकी ट्रेडिंग कीऔरऔर भी
शेयर बचाएं बचत को मुद्रास्फीति की मार से
महंगाई कैसे घुमाकर टैक्स लेने का काम करती है, यह पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस के लगातार बढ़ते दामों ने साबित कर दिया है। इधर लाखों लोगों का काम-धंधा बंद। जिनका बचा, उनकी आमदनी नहीं बढ़ी। ऊपर से महंगाई ने खर्च बढ़ाया तो बचत घटती गई। देश में घरेलू बचत दर पांच साल में 25.2% से 8.2% पर आ चुकी है। बैंक एफडी पर 5.4% ब्याज, जबकि मुद्रास्फीति की दर 6.3% है। मतलब, एफडी मे रखा धनऔरऔर भी
खबर का झुनझुना बजने से पहले किया खेल!
राकेश झुनझुनवाला ने जिस कंपनी, एप्टेक में इनसाइडर ट्रेडिंग की, उसमें उनके परिवार का 48% मालिकाना है। झुनझुनवाला का परिवार व सहयोगी मई 2016 से ही बाज़ार से एप्टेक के शेयर बटार रहे थे। सितंबर 2016 के शुरू में उनके भाई ने कंपनी के 2.5 लाख और बहन से 5 लाख शेयर खरीदे। ये सौदे 100 करोड़ रुपए से ज्यादा के थे। तब कंपनी के शेयरों पर 10% का अपर सर्किट लग गया। इसके कुछ दिन बादऔरऔर भी







