सेबी को चुकाए 37 करोड़ रुपए में राकेश झुनझुनवाला ने 18.5 करोड़, उनकी पत्नी रेखा ने 3.2 करोड़, भाई राजेश ने 1.22 करोड़, बहन सुधा गुप्ता ने 50 लाख, सास सुशीलादेवी ने 80 लाख, सहयोगी उत्पल सेठ ने 69 लाख, रमेश दामाणी ने 6.2 करोड़ और मधु जयकुमार ने 1.7 करोड़ रुपए दिए हैं। सोचिए! राकेश झुनझुनवाला का कितना बड़ा जाल-बट्टा था। बीवी, भाई, बहन, सास व सहयोगी तक लिप्त। इस साल 18 जनवरी को राकेश झुनझुनवालाऔरऔर भी

सेबी ने एप्टेक में हुई इनसाइडर ट्रेडिंग के मामले में राकेश झुनझुनवाला, उनकी पत्नी और आठ अन्य को दोषी पाया। इन आठ में राजेश कुमार झुनझुनवाला, सुशीलादेवी गुप्ता, सुधा गुप्ता, उत्पल सेठ, ऊष्मा सेठ सुले, रमेश दामाणी, मधु जयकुमार और चुग योगिंदर पाल शामिल हैं। सेबी के ‘कन्सेंट क्लॉज’ के तहत ये सभी कुल 37 करोड़ रुपए चुकाकर दोषमुक्त हो गए। ‘कन्सेंट क्लॉज’ में आरोपी न तो अपना दोष स्वीकार करता है और न इनकार। अमेरिका होताऔरऔर भी

रिटेल निवेशकों/ट्रेडरों में बड़े नामों के पीछे भागने की आदत है, बिना जाने कि तथाकथित बड़े खिलाड़ी कितने खेल करते रहते हैं। राकेश झुनझुनवाला ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं। उनके नाम से निवेश व ट्रेडिंग की फर्जी वेबसाइटें चलती हैं, जहा ब्रोकरों की तरह पहले से चढ़े शेयरों को खरीदने की सलाह दी जाती है। उन्हें भारत का वॉरेन बफेट भी कहते है। राकेश ने अपनी पत्नी रेखा और अपने नाम के पहले अक्षर को मिलाकर रारेऔरऔर भी

भारतीय निवेशक समझदार होता जा रहा है। वह सीधे खुद स्टॉक्स में निवेश करने के बजाय म्यूचुअल फंड का रास्ता अपनाने लगा है और इसमें भी ज्यादा निवेश सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए। वह समझ चुका है कि बाज़ार की चाल को पकड़ पाना मुश्किल है तो निश्चित रकम नियमित अंतराल पर लगाते रहो ताकि अपनी निवेश लागत संतुलित बनती जाए। निवेशकों ने जून में एसआईपी के ज़रिए म्यूचुअल फंड में 9155.84 करोड़ रुपए लगाए हैंऔरऔर भी