वीआईएक्स दिन-ब-दिन, असली खेला इंट्रा-डे
इंडिया वीआईएक्स से निफ्टी के दैनिक दायरे की गणना कैसे करते हैं? मसलन, इस साल 13 दिन की छुट्टी घटाकर 249 दिन ट्रेडिंग होनी है। 249 का वर्गमूल 15.78 हुआ। इंडिया वीआईएक्स कल 21.96 रहा है। इसे 15.78 से भाग दें तो उत्तर 1.39 निकला। इससे ट्रेडर निष्कर्ष निकालते हैं कि मौजूदा दौर में एक दिन से दूसरे दिन के बीच निफ्टी 1.39% तक ऊपर-नीचे जा सकता है। दिक्कत यह है कि इस गणना में इसका कोईऔरऔर भी
वोलैटिलिटी का पैमाना छलका, टूट भी गया है
इंडिया वीआईएक्स का निचला स्तर 10 का है, जबकि ऊपरी स्तर 80-90 तक जा सकता है। पिछले साल 24 मार्च को यह 86.35 तक ऊपर चला गया था, जबकि 17 दिसंबर को यह 14.05 पर 52 हफ्तों के न्यूनतम स्तर पर था। फिलहाल गिरते-गिरते 20-30 की रेंज में चल रहा है। सिद्धांततः माना जाता है कि यह सूचकांक 10-15 की रेंज में है तो बाज़ार में घबराहट बहुत कम है और 50-60 की रेंज या इससे ऊपरऔरऔर भी
चंचलता नापते रहे निफ्टी ऑप्शंस के भावों से
शेयर बाज़ार की वोलैटिलिटी/चंचलता नापने के लिए आमतौर पर इंडिया वीआईएक्स सूचकांक का इस्तेमाल किया जाता है। वीआईएक्स की शुरुआत मूलतः शिकागो बोर्ड ऑफ एक्सचेंज (सीबीओई) ने बाज़ार में व्याप्त डर, घबराहट व अनिश्चितता को मापने के लिए 1993 में की थी। उसके बाद इसके फॉर्मूले को 2003 में अपडेट किया गया। भारत में एनएसई इसका इस्तेमाल सीबीओई के लाइसेंस के तहत करता है। इंडिया वीआईएक्स की गणना निफ्टी ऑप्शंस के वर्तमान और अगले महीने के भावोंऔरऔर भी
अब तो रोज़ाना आता है बाज़ार में ज्वार-भाटा
करीब साल भर पहले जब से शेयर बाज़ार को कोरोना का ज़ोर का झटका लगा है, तब से वो दिन में ज्यादा ही उछल-कूद मचाने लगा है। पहले निफ्टी-50 दिन भर में 80-100 अंकों का चक्कर काटता था। लेकिन अब वो औसतन 200-350 अंक ऊपर-नीचे होता है। मसलन, शुक्रवार को निफ्टी-50 का दायरा 250 अंकों का रहा है। इसे तकनीकी भाषा में ‘वोलैटिलिटी’ कहते हैं। बाज़ार के लिए इतनी ज्यादा दैनिक वोलैटिलिटी कोरोना के झटके ससे उभरीऔरऔर भी
कैसे देखा जाए सट्टेबाज़ी की धुंध के उस पार!
कुछ लोगों के पास बहुत सारा सस्ता धन आता जा रहा हो और आर्थिक गतिविधियां ठहरी पड़ी हों तो वह धन उत्पादक कामों में लगने के बजाय सटोरिया गतिविधियां में लग जाता है। अमेरिका, यूरोप व जापान जैसे देशों से निकलता ऐसा लगभग शून्य ब्याज वाला धन पिछले दिनों बिट-कॉयन जैसी क्रिप्टो मुद्राओं में सट्टेबाज़ी करने लगा। वहां एकबारगी झटका लगा तो कोरोना की दूसरी लहर के बावजूद वह पलटकर दोबारा भारत जैसे शेयर बाज़ारों की तरफऔरऔर भी






