संसार और भी है टेक्निकल एनालिसिस के पार
ट्रेडिंग के आंगन में कदम रखते ही हर कोई टेक्निकल एनालिसिस की तरफ भागता है, जैसे हर लुटेरा ऱाजनेता बनने के लिए दिल्ली की तरफ भागता है। एकदम नौसिखिया ट्रेडर भी सपोर्ट, रेजिस्टेंस, आरएसआई, एमएसीडी और मूविंग एवरेज की बातें फर्राटे से करता है। लेकिन जो ठीक खुली आंखों से सामने दिख रहा है, उसे ही नहीं देखता। तीन साल पहले चर्चित हुई केरल की युवा अभिनेत्री प्रियाप्रकाश वारियर की तरह भौहें इधर-उधर उठाकर पूछता कि बाज़ारऔरऔर भी
कैसे रहेगी चूक न्यूनतम, सफलता अधिकतम!
वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग का कौशल हासिल करने के लिए आपको साफ-साफ पता होना चाहिए कि कोई सौदा आप क्यों कर रहे हैं। जब तक आप किसी सौदे को भलीभांति समझेंगे नहीं, तब तक आप में इतना आत्मविश्वास नहीं आ सकता कि आप उस पर मजबूती से अमल करें और दांव चूक जाने से उससे काम का सबक हासिल कर सकें। आपको ट्रेडिंग के लिए ज्ञान व सूचनाओं का अपना पूरा डेटाबेस एकदम चाक-चौबन्द रखना होगा। तभीऔरऔर भी
शेयर बाज़ार के बुलबुले की खैर कब तक!
भारत का जीडीपी बीते वित्त वर्ष 2020-21 में 145.69 लाख करोड़ रुपए से 7.3% घटकर 135.13 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। पिछले सौ सालों में हमारी अर्थव्यवस्था पहली बार बढ़ने के बजाय सिकुड़ी है। लेकिन इसी दौरान हमारा शेयर बाज़ार 68% बढ़कर ऐतिहासिक चोटी पर पहुंच गया। बीएसई में लिस्टेड लगभग 3500 कंपनियों का मूल्य या बाज़ार पूंजीकरण इस वक्त भारत के जीडीपी के डेढ़ गुना से ज्यादा 227.20 लाख करोड़ रुपए है। ऐसे में रिजर्वऔरऔर भी
ऊपर-ऊपर तेज़ी, नीचे बहती सुस्ती व मायूसी
ऊपर-ऊपर दिख रही तेज़ी के बीच शेयर बाज़ार के अंदर ही अंदर अजीब सुस्ती घुस गई है। बाज़ार के बढ़ने का संवेग/मोमेंटम घट गया है। सुबह से शाम तक इंतज़ार करनेवाला इंट्रा-डे ट्रेडर ब्रोकरेज़ व अन्य खर्चों के बाद दुखी होकर घर लौटता है। यहां तक कि ऑप्शन बेचनेवाले धुरंधर फाइनेंसर भी मायूस हो चले हैं। वे कॉल और पुट ऑप्शन के प्रीमियम बड़ा हिसाब-किताब लगाकर तय करते हैं। लेकिन शाम तक दोनों ऑप्शंस के प्रीमियम सिकुड़तेऔरऔर भी







