उठता-गिरता बाज़ार जान पर पड़े भारी!
बड़ा आसान लगता है वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार से कमाना। जहां हर दिन हज़ारों करोड़ों का कारोबार हो रहा हो, वहां से अपने लिए दो-चार हज़ार रुपए निकाल लेना क्या मुश्किल है! दिन के 5000 रुपए कमा लिए तो 20 दिन की ट्रेडिंग में महीने के एक लाख रुपए हो जाएंगे। 20% टैक्स भी चला गया तो महीने के 80,000 रुपए अपने और परिवार के गुजारे के लिए काफी हैं। बड़ा आसान गणित और मासूम गणनाऔरऔर भी
शेयर बाज़ार रिस्की, आत्मघात न करें!
शेयर बाज़ार में पिछले कुछ महीनों से जिस तरह हाई टाइड चल रहा है, जो निफ्टी पहले दिन में 90-100 अंक ऊपर-नीचे होता था, वो अब दिन में 250-300 अंकों का दायरा तय करने लगा है, उसे देखते किसी भी अनजान व्यक्ति के लिए बाज़ार में घुसना बेहद खतरनाक है। लेकिन मरता क्या न करता? जब हर तरफ काम-धंधे का अकाल है, नौकरियों का टोंटा है तो नौजवान कोई भी रिस्क लेने को तैयार है। इनको लाखऔरऔर भी
शेयर बाजार से जीविका है बड़ा यज्ञ प्रश्न!
दो साल से कोरोना ने जितने लोगों को संक्रमित किया, जितने लोगों की जान ली, उससे कई-कई गुना ज्यादा लोग काम-धंधे के ठप हो जाने, नौकरी चले जाने या वेतन घटा दिए जाने से परेशान हैं। मेरा एक परिचित नौजवान पहले एनजीओ में नौकरी करता था। करीब साल भर पहले उसकी नौकरी चली गई तो उसने बेसब्री से पूछा कि क्या मैं शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से अपना घर-परिवार नहीं चला सकता? इस वक्त देश में ऐसेऔरऔर भी
छोटा हो रहा है सफल निवेश का चक्र!
दुनिया भर के शेयर बाज़ारों के शीर्ष सूचकांकों में हमेशा उस वक्त की अच्छी से अच्छी कंपनियां रखी जाती हैं। कोई कंपनी आज है, हो सकता है कि पांच साल बाद न रहे। साल 1991 में सेंसेक्स में जो कंपनियां थी, 2001 आते-आते उनमें से 18 यानी 60% बदल दी गईं। निफ्टी-50 सूचकांक में तो जैसे 40% कंपनियां एक निश्चित अंतराल के बाद बदल देने का रिवाज़-सा बना हुआ है। इससे एक सबक तो यह है किऔरऔर भी







