कहीं का हड़कम्प हर तरह भूकम्प ले आए तो!
घबराहट व अफरातफरी के माहौल में रिटेल ट्रेडर बहुत ज्यादा चौकन्ने हो जाते हैं और दो कदम पीछे, एक कदम आगे की डिफेंसिव रणनीति अपनाते हैं। वहीं, बड़े व प्रोफेशनल ट्रेडर रिस्क को समझते हुए एक कदम पीछे, दो कदम आगे की एग्रेसिव रणनीति अपनाते हैं। असल में तमाम जानकारों का मानना है कि डेल्टा वैरिएंट भी बाज़ार को ज्यादा गिरा नहीं पाया था तो ओमिक्रॉन का असर भी अंततः कुछ दिनों बाद ठंडा पड़ जाएगा। वैसेऔरऔर भी
कोई घबराया, किसी के लिए मौका मुनाफे का
कोरोना वायरस का डेल्टा से कहीं ज्यादा खतरनाक वैरिएंट ओमिक्रॉन दुनिया में दस्तक दे चुका है। बताते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में किसी एचआईवी संक्रमित मरीज से म्यूटेट होकर निकले इस वैरिएंट पर वैक्सीन भी असर नहीं करती। यूरोप से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक इसकी धमक पहुंच चुकी है। भारत सरकार भी चौकन्नी हो गई है। हालांकि कुछ डॉक्टरों का कहना है कि अपने यहां जीनोम सीक्वेंसिंग का व्यापक सुविधा नहीं है तो कोरोना मरीजों के असली वायरसऔरऔर भी
तूफान में उखड़ जाएं पेड़, घास बचे सलामत!
शेयर बाज़ार अचानक जब धराशाई होने लगता है तब निवेश का वाजिब पोर्टफोलियो बनाने की अहमियत समझ में आती है। वैसे तो निफ्टी-50 और सेंसेक्स-30 भी क्रमशः 50 और 30 स्टॉक्स से मिलकर बना एक तरह का पोर्टफोलियो ही है। लेकिन इनका उठना-गिरना बाज़ार के उठने-गिरने का पर्याय है। इनके ज्यादा गिरने पर निवेश का पोर्टफोलियो ज्यादा न गिरे, ऐसी कंपनियों की टोकरी बनाना ही असली पोर्टफोलियो बनाना होता है। अमूमन 20-30 स्टॉक्स या कंपनियों की सूचीऔरऔर भी
लागत न्यूनतम, पूंजी सुरक्षित, बिज़नेस सफल!
वित्तीय बाजार में ट्रेडिंग से कमाने निकले हैं तो पहली बात समझ लीजिए कि यह एक बिजनेस है। लागत जितनी कम होगी, मुनाफे का मार्जिन उतना ज्यादा होगा। दूसरी बात, आपके पास बहुत सीमित पूंजी है। इस ट्रेडिंग पूंजी को हमेशा इतना बचाना है कि यह उड़ने न पाए। तीसरी और अंतिम बात। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना अपने दिलोदिमाग को संयत रखते हुए दूसरों के मनोविज्ञान को ताड़ने का खेल है। शेयरों के रोज़मर्रा केऔरऔर भी







