सरकार निवेशक नहीं, सटोरिया क्यों बना रही!
आम लोग लालच में पड़कर क्रिप्टो ट्रेडिंग की ओर दौड़ सकते हैं। लेकिन हमारी सरकार आम लोगों को क्यों आत्मघाती किस्म का सटोरिया बनाना चाहती है? आखिर क्यों उसने क्रिप्टो से होनेवाली कमाई पर 30% टैक्स लगाकर इसे मान्यता दे दी? गौर करने की बात है कि इसके भाव सिर्फ लालच से उपजी मांग से तय होते हैं। बाकी इसका कोई आधार नहीं। दुनिया भर में कहीं इसका कोई इसका नियंत्रक नहीं। फिर हमारी वित्त मंत्री नेऔरऔर भी
क्रिप्टो में ट्रेड शुद्ध सट्टेबाज़ी, फिर क्यों करना!
शेयर बाज़ार में हर स्टॉक के पीछे कोई न कोई बिजनेस और लिस्टेड कंपनी होती है। कंपनी का धंधा सॉलिड है तो उसका शेयर कभी न कभी बम-बम करेगा। हर डेरिवेटिव के पीछे कोई न कोई स्टॉक या सूचकांक होता है। सोने से लेकर हर मेटल या जिंस के फ्यूचर्स व ऑप्शंस के पीछे भी उसका भौतिक आधार होता है। लेकिन क्रिप्टो के पीछे क्या आधार है? कंप्यूटर प्रोग्रामिंग व आईटी के बहुत ऊंचे उस्ताद क्रिप्टो करेंसीऔरऔर भी
बजट में का बा? बनाने को बढ़ाया नहीं, घटाया, दिखाया दो लाख करोड़ ज्यादा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का चौथा बजट। सरकार द्वारा घोषित ‘अमृत काल’ के 25 साल का पहला बजट। साल 2022 का बजट। यहां से गिनेंगे तो वर्ष 2047 में भारत की आज़ादी को 100 साल हो जाएंगे। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने इस बार इसी India@100 का सपना दिखाया है। उन्होंने भांति-भांति की योजनाएं गिनाने के बाद दावा किया कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के जरिए देश की आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।औरऔर भी
आय पर ‘कट’ जारी, क्रिप्टो आय पर 30% कर
सरकार लोगों की कमाई में ‘कट’ लेने का कोई भी मौका नहीं चूकना चाहती। उसने इस बार के बजट में किसी को टैक्स की कोई राहत नहीं दी। न तो इनकम टैक्स की दरों या स्लैब में कोई तब्दीली की गई, न ही शेयर बाज़ार के सौदों पर लगनेवाला सिक्यूरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) हटाने की कोई बात हुई, जबकि इसे कैपिटल गेन्स टैक्स बचाने की हिकमत को खत्म करने के लिए लाया गया था और शॉर्ट-टर्म कैपिटलऔरऔर भी
बजट में एसटीटी का होगा अंत या बना रहेगा!
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट की चिंता, उससे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़नेवाले असर का आकलन आर्थिक समीक्षा में किया गया है। उसमें औद्योगिक से लेकर मैन्यूफैक्चरिंग व कृषि क्षेत्र तक की स्थिति और चुनौतियों पर नज़र डाली गई है। लेकिन असली मसला है कि आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने चौथे बजट में अर्थव्यवस्था की दुर्दशा को किस हद तक स्वीकार करती हैं और उसे बेहतर बनाने के लिए क्या राह निकालती हैं। कई सवाल हैं किऔरऔर भी






