क्रिकेटर आईपीएल के एक सीजन में ही करोड़ों कमा लेते हैं। लेकिन क्या हर कोई कामयाब क्रिकेटर बन सकता है? इसी तरह वित्तीय बाज़ार का सफल ट्रेडर बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नहीं है। इसके लिए गहरी व्यावहारिक समझ के साथ-साथ गहन अभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। यह सब अनायास चुटकी बजाकर नहीं होता। शेर के जबड़े से मांस का टुकड़ा निकालना आसान नहीं। शेयर बाज़ार में कभी तेज़ी का तूफान चलता है, कभी मंदी का अवसाद होता हैऔरऔर भी

जो काम-धंधा बंद होने या नौकरी छोड़ने से बेरोज़गार हो गए हैं, उनके अलावा भी लाखों बारोज़गार लोग हैं जिन्हें लगता कि वे नौकरी छोड़कर शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से अच्छा कमा सकते हैं। अभी तो कोविड का दौर चल रहा है। करीब पांच साल पहले एक ऐसे शख्स से मिला था जो आईसीआईसीआई बैंक की नौकरी छोड़कर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग करने पर आमादा था। उसका साफ कहना था कि वह निफ्टी-50 और बैंक निफ्टी केऔरऔर भी

शेयर बाज़ार के निवेशकों में ब्लूचिप-ब्लूचिप की बड़ी चर्चा होती है। भाव यह होता है कि ऐसी कंपनियों के निवेश में कोई रिस्क नहीं है। एक बार ले लो। फिर ज़िंदगी भर वे आपको रिटर्न देती रहती हैं। लेकिन यह एक भयंकर भ्रम है। रिस्क ब्लूचिप कंपनियों में भी भरपूर होता है। कल की ब्लूचिप कंपनी को खाक बनते देर नहीं लगती। इसलिए ब्लूचिप के पीछे भागने से अच्छा है कि ऐसी कंपनी चुनो जिसके बिजनेस मेंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से घर-परिवार चला लेना आम इंसान के लिए महज़ एक सब्ज़बाग है। अगर कोई घर-परिवार व बच्चों की पढ़ाई से लेकर आकस्मिक खर्चों का इंतज़ाम एफडी की ब्याज या प्रॉपर्टी के किराए जैसे सुरक्षित व नियमित माध्यम से कर लेने की स्थिति में है और कम से कम 50 लाख रुपए ट्रेडिंग के लिए निकाल सकता है, वही यह काम कर सकता है। आज के दौर में मेडिकल जैसी आकस्मिक ज़रूरतों से लेकरऔरऔर भी

नियमित आय का पुख्ता इंतज़ाम न किया तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग कभी भी मात दे सकती है। बीमार हुए, घर में कोई समारोह या खास काम आ गया तो ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। बाज़ार में अफरातफरी मची है, वो गिरता जा रहा है तो ट्रेडिंग करने में भयंकर रिस्क है जो आप नहीं उठा सकते। इस तरह किसी दिन या कई-कई दिन पाच हज़ार क्या, एक-दो हज़ार भी नहीं कमाया तो आगे की सारी गणना गड़बड़ाऔरऔर भी