न क्रिप्टो, न ट्रेडिंग, केवल लम्बा निवेश!
एक बात हमें अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि न तो अपने यहां देखभाल करनेवाला समाज है और न ही सरकार। हर कोई स्वार्थ का पुतला है। सरकार भी चंद निहित स्वार्थों की सेवा में लगी है। सबका साथ, सबका विकास महज अवाम को झांसा देने का नारा है। सबका विश्वास भी चरका पढ़ाकर हासिल किया जाता है। हमें अपना हित खुद समझना और हासिल करना है। शेयर बाज़ार पर भी यह बात पूरी तरह लागू होतीऔरऔर भी
कमाना होगा ट्रेडिंग में नौकरी से ज्यादा!
हिसाब बड़ा साफ है। अगर आप नौकरी से महीने में एक लाख रुपए की सैलरी हासिल कर रहे हैं तो शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग या किसी अन्य बिजनेस से एक लाख कमाते हैं तब असल में माना जाएगा कि आपके उद्यम का तुलनात्मक ‘आर्थिक मूल्य’ शून्य हुआ, यानी आप पहले जैसी ही स्थिति में बने हुए हैं। अगर ट्रेडिंग से आप महीने में 40-50 हज़ार रुपए कमा लेते हैं (जो बुरी कमाई नहीं है), तब आप प्रतिमाहऔरऔर भी
तकलीफ बढ़ाई तो रिटर्न भी ज्यादा हो!
शेयर बाज़ार में सुरक्षित ट्रेडिंग के लिए मूलभूत शर्ते हैं – कम से कम 50 लाख की ट्रेडिंग पूंजी, घर-परिवार के लिए नियमित गुजारे के लिए 2.50 करोड़ रुपए की एफडी जैसे माध्यम, कम से कम दो साल के घर-खर्च का अलग इंतज़ाम। इन सभी शर्तों का पूरा करने से भी ट्रेडिंग में सफलता सुनिश्चित नहीं होती। इसे सुनिश्चित कर सकता है केवल और केवल आपका गहन अभ्यास। इसके बाद का रास्ता भी कतई आसान नहीं है।औरऔर भी
जीतने का एक सूत्र: ‘अभ्यासेन कौन्तेय’
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का खेल है, प्रतिस्पर्धा है। इसमें देश ही नहीं, विदेश तक के लाखों खिलाड़ी सक्रिय हैं। सब एक से बढ़कर खेल। पूंजी से लेकर ज्ञान और हुनर के उस्ताद। ऊपर से सिस्टम की छोटी से छोटी कमज़ोरी से खेलनेवाले खिलाड़ी। बॉक्सिंग सभी कर सकते हैं। मुठ्ठी बांधकर चलाना किसे नहीं आता! लेकिन रिंग में सामनेवाले को नॉक-आउट करने से पहले हज़ारों घंटों के अभ्यास की दरकार होती है। स्टॉक ट्रेडिंग मेंऔरऔर भी







