कहीं का हड़कम्प हर तरह भूकम्प ले आए तो!

घबराहट व अफरातफरी के माहौल में रिटेल ट्रेडर बहुत ज्यादा चौकन्ने हो जाते हैं और दो कदम पीछे, एक कदम आगे की डिफेंसिव रणनीति अपनाते हैं। वहीं, बड़े व प्रोफेशनल ट्रेडर रिस्क को समझते हुए एक कदम पीछे, दो कदम आगे की एग्रेसिव रणनीति अपनाते हैं। असल में तमाम जानकारों का मानना है कि डेल्टा वैरिएंट भी बाज़ार को ज्यादा गिरा नहीं पाया था तो ओमिक्रॉन का असर भी अंततः कुछ दिनों बाद ठंडा पड़ जाएगा। वैसे भी शेयर बाज़ार में अभी तेज़ी का पलड़ा हावी है। यह अलग बात है कि आज जिस तरह दुनिया भर के वित्तीय बाज़ार, खासकर शेयर बाज़ार ग्लोबल हो चुके हैं, उसमें कहीं का हड़कम्प हर तरफ भूकम्प ला सकता है। इसलिए सावधानी तो हर पल बरतनी ही चाहिए। अब मंगलवार की दृष्टि…

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