जब हमारे स्टॉक एक्सचेंजों में इंट्रा-डे से लेकर डेरिवेटिव ट्रेडिंग तक की पूरी सहूलियत है, तब आखिर लोगबाग डब्बा ट्रेडिंग जैसे गलत व गैर-कानूनी काम करते ही क्यों हैं? इसके कुछ बड़े साफ कारण हैं। पहला तो यह कि डब्बा ट्रेडिंग करानेवाला ऑपरेटर गैरकानूनी ट्रेडिंग कर रहा है तो वह ट्रेड करनेवालों से कोई स्पैन मार्जिन, मार्क टू मार्केट रकम वगैरह नहीं लेता, न ले सकता है। वो बहुत हुआ तो लोगों से मोटामोटी सांकेतिक या. टोकनऔरऔर भी

अगर आप शेयरों की ट्रेडिंग में दिलचस्पी रखते हैं तो डब्बा ट्रेडिंग का नाम ज़रूर सुना होगा। हर गैर-कानूनी काम की तरह यह भी हल्के-फुल्के मुंगेरीलाल टाइप लोगों को खूब खींचता है। कोई लिखा-पढ़ी नहीं, रिकॉर्ड नहीं, सारा लेनदेन कैश में, सारी कमाई काली। इनकम टैक्स देने या रिटर्न भरने का सवाल ही नहीं। सारे सौदे स्टॉक एक्सचेंज के बाहर होते हैं तो सिक्यूरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स भी नहीं। कोई दिक्कत आने या ठगे जाने पर एक्सचेंज याऔरऔर भी

शेयर बाज़ार आशा और निराशा की अतियों के बीच झूलता है। अनिश्चितता के मौजूदा दौर में कुल लोग कह रहे हैं कि सेंसेक्स 1,50,000 तक चला जाएगा तो कुछ का मानना है कि वो 40,000 तक गिर सकता है। यह भी सच है कि बाज़ार को सामान्य या अनुमानित घटनाएं नहीं, बल्कि अचानक होनेवाला अचम्भा बड़ा झटका देता है। लेकिन अच्छी कंपनियों का धंधा बाज़ार को लगनेवाले झटके के बीच भी शांत व सहज गति से बढ़ताऔरऔर भी

सवाल उठता है कि जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) दशकों से भारत पर लट्टू रहे हैं, नोटबंदी की तंगी और कोरोना की तगड़ी मार के बीच भी जिन्हें भरपूर उम्मीद थी, वे अब यहां से क्यों किनारा कसने लगे हैं? भारतीय शेयर बाज़ार में छह महीनों से जिस तरह उन्होंने भयंकर मुनाफावसूली की है, वह अभूतपूर्व है। जानकारों के मुताबिक एफपीआई को लगता है कि जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करनेवाला भारत दुनिया में कच्चेऔरऔर भी

दुनिया के कौन-से देश है जहां से एफपीआई के रूप में सबसे ज्यादा धन भारत के वित्तीय बाज़ार में आता है? भारत में निवेश करनेवाले शीर्ष 10-11 देशों में अमेरिका टॉप पर है। उसके बाद मॉरीशस, लक्ज़मबर्ग, सिंगापुर, ब्रिटेन, आयरलैंड, कनाडा, जापान, नॉरवे, फ्रांस व नीदरलैंड्स (हॉलैंड) का नंबर है। ध्यान दें कि इसमें यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्था जर्मनी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन का नाम नहीं है। इसकी एक वजह तो है किऔरऔर भी