ब्याज दरों के भारी अंतर के कारण भारत में अमेरिका से उधार लिया गया धन आराम से 5% मुनाफा कमा सकता है। इस पर यकीनन डॉलर और रुपए की विनिमय दर का असर पड़ेगा। डॉलर की आवक या सप्लाई बढ़ती है तो रुपया महंगा होता है और एक डॉलर में कम रुपए मिलते हैं। जैसे, 15 दिसंबर 2021 को एक डॉलर में 76.34 डॉलर मिल रहे थे, जबकि 14 जनवरी 2022 को एक डॉलर में 74.16 रुपएऔरऔर भी

अमेरिका में ब्याज दर कम, भारत में ज्यादा। वहां से उधार लो, यहां लगाओ और अंतर से कमाई कर लो। इसे कैश कैरी ट्रेड या आर्बिट्रेज कहते हैं। सवाल उठता है कि क्या टैपरिंग के बाद अमेरिका से डॉलर के निकलकर भारत आने पर नकारात्मक असर पड़ेगा। यकीनन पड़ेगा। लेकिन यह असर इतना कम होगा कि उससे धन के प्रवाह पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। अमेरिका में ब्याज दर अभी 0.25% है। इसे टैपरिंग के दौरानऔरऔर भी

टैपरिंग का सीधा-सा मतलब होता है अर्थव्यवस्था को दिए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन से हाथ खींचना। अमेरिका में फेडरल रिजर्व की योजना है कि वह इस साल मार्च तक सिस्टम में बॉन्ड खरीदकर डॉलर डालने के कार्यक्रम  में कटौती या टैपरिंग शुरू कर देगा। उसके बाद वह खरीदे गए बॉन्डों को निकालने लगेगा। इससे बॉन्ड के भाव घटेंगे और उसी अनुपात में उन पर यील्ड या ब्याज की दर बढ़ने लगेगी जिससे बढ़ती मुद्रास्फीति को रोकने मेंऔरऔर भी

अमेरिका में अप्रैल 2020 में कोविड का प्रकोप शुरू होने के समय से वहां का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व बॉन्ड खरीदकर सिस्टम में डॉलर झोंक रहा है। नतीजतन, उसकी बैलेंस शीट 12 जनवरी 2022 तक 8788.30 अरब डॉलर की हो चुकी थी। इसमें 1425 अरब डॉलर का इजाफा बीते साल 2021 में हुआ है। फेड सरकारी बॉन्ड, बंधक रखी प्रतिभूतियों से जुड़े बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदकर सिस्टम में डॉलर डालता है। इससे वित्तीय बाज़ार में नकदीऔरऔर भी