अर्थव्यवस्था संसद या विधानसभा का चुनाव नहीं, जिसे तंत्र की ताकत और जोड़-तोड़ से जीत लिया जाए। न ही यह किसी जादूगर का सम्मोहन है जिसमें सारी भीड़ को एक साथ मदमस्त कर नचा लिया जाए। लेकिन मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन को लगता है कि उनके पास ऐसी सम्मोहनी शक्ति है जिससे वे भारतीय अवाम की आंखों में धूल झोंक सकते हैं। उन्होंने पिछले ही हफ्ते आईआईटी मद्रास में इंजीनियरिंग के छात्रों और प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है जिसके लिए सालाना डॉलर में 12% की विकास दर हासिल करनी होगी। हमारा रुपया अमूमन डॉलर के मुकाबले औसतन हर साल 4-5% कमज़ोर होता है। इसलिए डॉलर में 12% सालाना विकास दर का मतलब होगा रुपए में 16.5% से लेकर 17.6% की विकास दर। जिस अर्थव्यवस्था की नॉमिनल विकास दर घटते-घटते 2025-26 में 8.6% पर आ गई हो, उससे इसकी दोगुनी विकास की अपेक्षा कोई भयंकर पागल या झांसेबाज़ ही कर सकता है। लेकिन नागेश्वरन यही कर रहे हैं। क्या उन्होंने शून्य के आविष्कार से लेकर महान गणितज्ञों की परम्परा वाले देश को इतना बौड़म समझ रखा है? मगर जब सत्ता ने सारे कुंओं में भांग घोल दी हो तो आईआईटी के छात्र और प्रोफेसर तक मतिअंध बन जाते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…
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