शेयर बाज़ार तो अधीर, आप मत बनना!
शेयर बाज़ार स्वभाव से ही अधीर है। लेकिन इसमें लम्बे समय के लिए निवेश करनेवालों को बड़ा धैर्यवान होना पड़ता है। उन्होंने अधीरता दिखाई तो यहां से कभी कमा नहीं सकते। अधीर स्वभाव वाले निवेशकों को सरकारी बॉन्डो, पीपीएफ या बैंक डिपॉजिट का ही आसरा लेना चाहिए। नहीं तो शेयर बाज़ार के निवेश को लेकर वे ताज़िंदगी रोते ही रहेंगे कि मार डाला, हाय! मारा डाला। संभावनामय बिजनेस वाली कंपनी चुनो और भूल जाओ। कंपनी के कामकाजऔरऔर भी
न लिखत, न पढ़त, न ही कोई सुनवाई!
डब्बा ट्रेडिंग में ऐसे भी मामले होते हैं कि एक्सचेंज के सर्वर पर कोई सौदा नहीं होता। क्लाएंट को घाटा हो रहा होता है, फिर भी वह सौदा नहीं काटता। वह घाटे पर सौदा काट भी ले तो ऑपरेटर उसे क्रेडिट दे देता है। असल में उसका सारा तंत्र हवा-हवाई होता है। उसे बस क्लाएंट को चूना लगाना होता है। आपसे धन लेना होगा तो ऑपरेटर आपके घर रिकवरी एजेंट भेज देगा। लेकिन उसको धन देना होगाऔरऔर भी
ऑपरेटर ही चांदी काटता है डब्बा ट्रेड में
जो डब्बा ऑपरेटर स्टॉक एक्सचेंज के जरिए और ब्रोकर को शामिल करके आपके डब्बा ट्रेड को अंजाम देता है, वह यकीनन गैर-कानूनी काम करता है। लेकिन जो डब्बा ऑपरेटर एक्सचेंज का सहारा नहीं लेता, वह कहीं ज्यादा खतरनाक है। वह चूंकि एक्सचेंज या किसी ब्रोकर को शामिल नहीं करता तो उसे न कोई मार्जिन देना होता है और न ही ब्रोकरेज, इसलिए आपसे बहुत कम शुल्क लेता है। लेकिन वह अपनी कोई पूंजी नहीं लगाता और केवलऔरऔर भी
कुछ डब्बा ट्रेडर ऐसे तो कुछ होते हैं वैसे
अपने यहां शेयर बाज़ार में सक्रिय डब्बा ऑपरेटर दो तरह के होते हैं। एक जो आपके ट्रेड को एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर ले जाता है। लेकिन आप से सारी रकम कैश में लेता है। अपने खाते में अपने नाम से ही ट्रेड करता है। स्पैन से लेकर मार्क टू मार्केट मार्जिन तक देता है। यह ऑपरेटर चूंकि रिस्क ले रहा है तो इसके एवज़ में वो डब्बा ट्रेडर से पूरा ब्रोकरेज लेता है। दूसरा डब्बा ऑपरेटर वोऔरऔर भी







