अपने शेयर बाज़ार में हर्षद मेहता निपट गए। केतन पारेख का चांद भी डूब गया। लेकिन राकेश झुनझुनवाला का सितारा मरते दम तक चमकता रहा, दौलत बढ़ती रही। इसकी दो साफ वजहें हैं। एक तो यह कि राकेश ने कभी ठगी या फ्रॉड का सहारा नहीं लिया, न ही उन्होंने कभी फिक्सर का काम किया, जबकि हर्षद मेहता से लेकर केतन पारेख तक हमेशा सिस्टम को मैन्यूपुलेट करते रहे, उससे खेलते रहे। वहीं, झुनझुनवाला समय व हालातऔरऔर भी

दुनिया के अधिकांश शीर्ष निवेशकों ने दूसरों का धन निवेश करके रिटर्न कमाया। उनका प्रमुख माध्यम हेज फंड रहा। लेकिन राकेश झुनझुनवाला अपना ही धन गुना-दर-गुना करते रहे। आम लोगों के लिए उनकी सलाह यही रहती कि सीधे स्टॉक्स के बजाय म्यूचुअल फंड के जरिए शेयर बाज़ार में निवेश करो। लेकिन वे खुद जमकर रिस्क लेते थे। यहां तक कि उधार लेकर भी धन लगाते थे। वे भारतीय बाज़ार की तेज़ी को लेकर इतने आश्वस्त थे किऔरऔर भी

दुनिया में जॉर्ज सोरोस, स्टेनली ड्रकेनमिलर व वॉरेन बफेट जैसे दिग्गज निवेशकों का रिटर्न अमूमन 20% तक रहता आया है। कभी-कभार ही वह 30% से ऊपर पहुंचता है। निवेश से जमकर कमाना कोई बाएं हाथ का खेल नहीं है। लेकिन राकेश झुनझुनवाला ने अपनी बहुत छोटी-सी टीम के साथ अकेले दम पर शेयर बाज़ार से शानदार रिटर्न कमाया। उनके ज्यादा रिटर्न कमानेवाले जेम्स साइमंस एक तो खुद गणितज्ञ हैं, दूसरे उन्होंने बेहद मेधावी गणितज्ञों व भौतिकविदों कीऔरऔर भी

बताते हैं कि राकेश झुनझुनवाला में 1985 में ₹5000 से अपनी निवेश यात्रा शुरू की। 14 अगस्त 2022 को जब हार्ट-अटैक से उनका निधन हुआ, तब उनके निवेश का कुल बाज़ार मूल्य एक अनुमान के मुताबिक ₹50,000 करोड़ और दूसरे अनुमान के मुताबिक ₹30,000 करोड़ रुपए था। पहले अनुमान में उनके सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न की दर (सीएजीआर) 64.52% निकलती है, जबकि दूसरे अनुमान में यह 62.26% निकलती है। इतना रिटर्न न वॉरेन बफेट कमा पाए हैं, नऔरऔर भी

राकेश झुनझुनवाला को भारत का वॉरेन बफेट कहा जाता था। बफेट दुनिया में महानतम निवेशकों में शुमार हैं। 1930 में जन्मे बफेट 92 साल की उम्र में अब भी सक्रिय हैं, जबकि 1960 में जन्मे झुनझुनवाला महीने भर पहले 62 साल की उम्र में दुनिया से विदा हो गए। लेकिन शायद ही कोई जानता है कि निवेश में झुनझुनवाला बफेट से कहीं ज्यादा कामयाब रहे। बफेट ने अपने पहले निवेश उद्यम में 1957 से 1968 तक 31.6%औरऔर भी