लक्ष्य हो बेंचमार्क सूचकांक को मात देना
वॉरेन बफेट ने निवेश के शुरुआती दस सालों में बराबबर 30% से ज्यादा सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से रिटर्न कमाया। 31.6% का यह रिटर्न उन्होंने अपने शुरुआती निवेश उद्यम, बफेट पार्टनरशिप के ज़रिए साल 1957 से 1968 तक की अवधि में हासिल किया। उस दौरान अमेरिका के बेंचमार्क शेयर सूचकांक डाउ जोन्स का रिटर्न 9.1% था। उन दिनों बफेट का लक्ष्य था निवेश से कम से कम 10% सीएजीआर से कमाकर बेंचमार्क सूचकांक को मात देना। बादऔरऔर भी
दस लाख से कैसे बनाए 10,000 करोड़?
दुनिया भर में शेयर बाज़ार में निवेश व ट्रेडिंग के उस्तादों पर जैक श्वैगर ने ‘मार्केट विज़ार्ड्स’ नाम की किताबों की पूरी सीरीज लिख रखी है। जॉर्ज सोरोस और उनके पूर्व पार्टनर जिम रोजर्स ने अपनी निवेश रणनीति पर अनेक किताबें लिखी हैं। वॉरेन बफेट पर तो बाज़ार में अनगिनत किताबें हैं। उन्हें दुनिया के महानतम निवेशकों में गिना जाता है। उन्होंने सात दशकों में करीब 10,000 करोड़ डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपए) की दौलत कमाईऔरऔर भी
ट्रेडिंग व निवेश की सफलता का राज़दार
भारत में विकासगाथा में अटूट विश्वास शेयर बाज़ार के निवेश में राकेश झुनझुनवाला की अप्रतिम सफलता का मूलाधार बन गया। जिस वॉरेन बफेट से उनकी तुलना की जाती है, उन्होंने उनसे ज्यादा कमाया। लेकिन वॉरेन बफेट की सफलता और निवेश रणनीति पर अनेकों-अनेक किताबें हैं, जबकि राकेश झुनझुनवाला पर एक भी नहीं। अपने यहां यही दिक्कत है कि राजनेताओं के मरने से पहले ही उनके जीवनवृत्त लिख लिए जाते हैं और मरने के चंद दिन बाद छापऔरऔर भी
माइक्रो-कैप स्टॉक्स में दमखम हो भरपूर
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि; जहां काम आवे सुई, कहा करे तलवारि। जीवन में छोटी-छोटी चीजों की बड़ी अहमियत है। हमारी अर्थव्यवस्था में भी लघु उद्योगों का भारी योगदान है। लघु समय के साथ बड़ा हो जाता है। सरकार ने हाल ही में लघु कंपनियों की परिभाषा बदल दी है। उसने तय किया है कि अब 4 करोड़ रुपए तक की चुकता पूंजी वाली कंपनियों को लघु माना जाएगा। इससे पहले 2013 में यहऔरऔर भी









